जनपद में कई स्थानों पर लगा है चंदन
बिजनौर। जिले की जलवायु चंदन के लिए बेहद अनुकूल है। जिले में कई लोगों ने चंदन के पौधे लगा रखे हैं। लेकिन बडे़ स्तर पर इसकी खेती अभी जिले में नहीं की जा रही है। यदि जिले के किसान इस ओर ध्यान दें को वह अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
गांव मुरलीवाला के डॉ. इकबाल सिंह ने 12 साल पूर्व चंदन के पेड़ लगाने की शुरूआत की थी। आज दो बीघे भूमि में उनके पास 30 चंदन के पेड़ लगे हुए हैं। साथ ही सागौन के पेड़ व कपूर, हींग के पौधे भी अपने बगीचे में लगा रखे हैं। उन्होंने बताया कि चंदन की खेती कर्नाटक जैसे प्रदेश में बहुतायत है। दस वर्ष के पेड़ हो जाने पर उनसे खुशबू आने लगती है। इसकी पत्तियों, जड़, बीज आदि का भी पूरा इस्तेमाल किया जाता है। चंदन की दो प्रजाति मिलती हैं उनमें लाल व सफेद चंदन। लाल चंदन में खुशबू कम है, जबकि सफेद चंदन में भरपूर मात्रा में खुशबू है। इसके कारण इसकी कीमत ज्यादा मिलती है। उन्होंने किसानों से इसी प्रकार की उन्नत खेती करने की बात कही है।
नजीबाबाद कोटद्वार मार्ग पर बड़िया में देवराज सहगल ने अपने घर में चंदन का पेड़ लगा रखा है। वे बताते हैं कि छह साल पूर्व उन्होंने यह पेड़ लगाया था। पेड़ बहुत बढ़िया चल रहा है। नजीबाबाद में राजीव अग्रवाल ने अपने पेट्रोल पंप पर चंदन लगा रखा है। वह कहते हैं कि करीब 14-15 साल पुराना पेड़ है। उसका तना भी डेढ़ फीट मोटा हो गया है। गंज में माता गायत्री देवी नर्सिंग स्कूल में लगभग दो साल पूर्व चंदन का पौधा लगाया गया था। स्कूल के प्रबंधक पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश बताते हैं कि चंदन का पौधा बहुत बढ़िया चल रहा है। अब वह और चंदन के पौधे लगाने के इच्छुक हैं।
स्योहारा रियासत में भी चंदन के पांच पेड़ हैं। कुंवर राणा प्रताप सिंह बताते हैं कि इनमें एक पेड़ हाई ब्रीड का है। बाकी देसी चंदन के पेड़ हैं। ये सारे पेड़ आठ नौ साल पुराने हैं। धामपुर के गांव सुहागपुर में ठाकुर अभय कुमार के गार्डन में भी चंदन का पेड़ है। वे बताते हैं कि ये लगभग 15 साल पूर्व लगाया गया था। धामपुर विधायक अशोक राणा ने बताया कि उनके उद्यान में चंदन के दो पेड़ हैं। इनमें पेड़ करीब 17 साल पुराना है। इन दोनों पेड़ रायबरेली निवासी उनके मित्र अनूप कुमार पांडेय ने लखनऊ में उन्हें उपहार स्वरूप प्रदान किए थे।
धामपुर में चंदन का पेड़ दिखाते विधायक अशोक राणा।- फोटो : BIJNOR
बिजनौर के गंज में चंदन का पेड़ दिखाते पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश।- फोटो : BIJNOR