बिजनौर में फोरलेन हाइवे के निर्माणाधीन अंडरपास का गिरे स्लैब का एकत्र मलवा। संवाद
बिजनौर। कंक्रीट और सरिया का नमूना अभी तक जांच के लिए लैब नहीं भेजा जा सका है। नमूने, लोक निर्माण विभाग के दफ्तर में पड़े हुए हैं। दरअसल इनकी जांच में आने वाला खर्च भी निर्माण कंपनी ही उठाएगी। ऐसे में लोनिवि को निर्माण कंपनी से खर्च की रकम का ड्राफ्ट मिलने का इंतजार है।
मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे को फोरलेन में तब्दील किया जा रहा है। बिजनौर बैराज मार्ग पर फोरलेन के अंडरपास का स्लैब तीन दिन पहले बनते बनते ही गिर गया था। जिसके बाद खूब हल्ला मचा। एनएचएआई अपने स्तर से भी जांच में लगा। नेशनल हाईवे के दिल्ली मुख्यालय से बाकायदा जांच टीम का गठन किया गया। उक्त टीम जांच करने के लिए बुधवार को आने वाली थी लेकिन किन्ही कारणों के चलते नहीं आ सकी।
इसके अलावा बिजनौर डीएम ने एनएचएआई से इतर अपने स्तर से जांच कराने के आदेश लोक निर्माण विभाग को दिए थे। इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग ने स्लैब में इस्तेमाल कंक्रीट और सरिया का नमूना लिया। जिसकी गुणवत्ता की जांच के लिए लैब में भेजा जाना है। मगर दो दिनों से नमूने लोक निर्माण विभाग के दफ्तर में पड़े हुए हैं।
जिन्हें अभी तक लैब नहीं भेजा जा सका है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि इन्हें जांच के लिए तब भेजा जाएगा जब निर्माण करने वाली कंपनी या ठेकेदार की ओर से ड्राफ्ट मिल जाएगा। यानि जांच में आने वाला खर्च भी ठेकेदार को ही वहन करना है। यह टेंडर के अनुबंध में भी शामिल होता है।
मौके से हटाया गया मलबा
स्लैब गिरने के बाद मलबा और शटरिंग मौके पर पड़े हुए थे। जिसके बाद निर्माण करने वाली कंपनी ने उक्त मलबे को मौके से हटाकर पास में ही ढेर लगा दिया है। मौके पर साफ नजर आ रहा है कि शटरिंग के पाइप किस तरह से मुड़ गए थे। उधर चर्चा है कि दिल्ली से आने वाली जांच टीम के पहुंचने से पहले ही मौके से मलबा हटाकर पास में ही ढेर लगा दिया गया है।
कंक्रीट और सरिया का नमूना लिया जा चुका है। जल्द ही जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। हालांकि इसके लिए ड्राफ्ट का इंतजार किया जा रहा है। ....हेमंत प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि