समझौते के बाद शांत हुए सफाई कर्मचारी
स्योहारा। महिला सफाईकर्मी की बृहस्पतिवार को हुई मौत के मामले में बृहस्पतिवार रात नगर पालिका और मृतका के परिजनों के बीच समझौता हो गया। समझौते के अनुसार ऊषा देवी के एक पुत्र को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दी जाएगी। जबकि दो पुत्रों को आउट सोर्सिंग के तौर पर रोजगार दिया जाएगा। 20 लाख रुपये मुआवजे के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
समझौता वार्ता में अधिशासी अधिकारी एपी पांडेय, थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार गौड़, वाल्मीकि महासंघ प्रदेश अध्यक्ष मयंक हंसराज, प्रदेश महासचिव अनूप वाल्मीकि, चेयरमैन अख्तर जलील, पूर्व सभासद अरविंद वाल्मीकि, प्रमोद कुमार वाल्मीकि, सेवक वाल्मीकि, अनिल वाल्मीकि शामिल रहे। अधिशासी अधिकारी ने एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता व्यक्तिगत रूप से की। शुक्रवार दोपहर को महिला का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान ईओ ने एक लाख रुपये नगद मृतका के पुत्र को दिए। पालिका में सफाई कर्मी की मृत्यु पर शोक घोषित कर कार्यालय बंद रखे गए। आरोपी नगर पालिका वरिष्ठ क्लर्क देवेंद्र कुमार को पुलिस ने अपनी सुरक्षा में ले रखा है।
अधिशासी अधिकारी ने पूरे मामले को षड्यंत्र बताया। उनका कहना है कि महिला सफाईकर्मी ऊषा देवी काफी समय से बीमार चल रही थी, फिर भी मानवता के नाते उनसे काम न लेकर वेतन दिया जा रहा था। ऊषा देवी का वेतन 30 हजार रुपये प्रति माह है जबकि उन्होंने नगर पालिका से दो अलग-अलग ऋण ले रखे हैं। पीएफ आदि कटकर मात्र नौ दस हजार रुपये उन्हें प्रतिमाह मिलते हैं। उन्होंने 50 हजार के ऋण के लिए फिर से आवेदन कर दिया था। लिपिक देवेंद्र कुमार ने यही समझाया था कि आखिर उनके ऋण की किस्तें कैसे जमा होंगी।