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कार्तिक स्नान मेले के लिए दो तरफ से बनेगी सड़क

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कार्तिक स्नान मेले के लिए दो तरफ से बनेगी सड़क
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बिजनौर। विदुरकुटी के पास लगने वाले गंगा स्नान मेले में इस बार दो सड़क बनाई जा रही हैं। मेला सिर्फ विदुरकुटी से ही नहीं जुड़ेगा, बल्कि इसमें दारानगर गंज से भी जाया जा सकेगा। आपात स्थिति और भीड़ की संभावना को देखते हुए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने पर एक राय बनी है। वहीं, अफसरों ने मेला स्थल का मौका मुआयना कर तैयारियों से लेकर सुरक्षा इंतजामों पर भी मंथन किया।
सोमवार को डीएम उमेश मिश्रा और एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने गंगा स्नान कार्तिक पूर्णिमा मेला स्थल का निरीक्षण किया। उनके साथ सभी विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को निर्देश दिए कि गंगा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं की विशेष रूप से व्यवस्था करें। स्नान स्थल पर कड़ी निगरानी और गोताखोरों की टीम के साथ नाव तैयार रखी जाए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि समय-समय पर मेले में दुकानों पर तैयार एवं बिकने वाली खाद्य सामग्री का निरीक्षण करें, ताकि विषाक्त भोजन की समस्या उत्पन्न होने न पाए। इस दौरान एएसपी सिटी डॉ. प्रवीण रंजन सिंह, सीडीओ केपी सिंह, एएमए श्याम बहादुर आदि मौजूद रहे।
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सीसीटीवी और ड्रोन से होगी निगरानी
मेला स्थल पर चौबीस घंटे पुलिस बल तैनात रहेगा। सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। ताकि पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की पैनी निगाह रह सके। इसके अलावा ड्रोन से भी मेले की निगरानी होगी। मेला स्थल और उसके आसपास के क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल तथा मोबाइल शौचालय की भी व्यवस्था रहेगी।
मेले पर खर्च होने हैं 65 लाख रुपये
जिला पंचायत ने गंगा स्नान मेले पर खर्च करने के लिए 65 लाख रुपये का बजट रखा है। पिछली बार से इसमें दस प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि एक और वैकल्पिक सड़क बनाए जाने के चलते खर्च बढ़ सकता है। जिसके लिए जिला प्रशासन ने हामी भर दी है।
जलापूर्ति पर होगा विशेष जोर
इस बार शौचालयों को स्थायी जलापूर्ति से जोड़ा जाएगा। जिसके लिए मेले में अस्थायी ओवर हैड टैंक रखकर पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति होगी। पिछले सालों में सिर्फ हैंडपंप का ही सहारा होता था। शौचालयों के अलावा भी मेले में पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति को रूपरेखा तैयार की गई है।
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नहीं हो सका राजकीय मेला घोषित
विदुरकुटी के मेले को राजकीय मेला घोषित कराए जाने की कवायद दो साल पहले चली थी। हालांकि इस पर कुछ हो नहीं पाया। अगर मेला राजकीय की श्रेणी में आ जाता तो भव्यता और भी ज्यादा होती। क्योंकि जिला पंचायत एक निर्धारित सीमा तक ही खर्च कर सकती है।

जिनौर में विदुर कुटी के सामने लगने वाले गंगा स्नान मेले स्थल के निरीक्षण के दौरान जानकारी लेते डी- फोटो : BIJNOR

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