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अब दोबारा निर्धारित होगा आरक्षण

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अब दोबारा निर्धारित होगा आरक्षण
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बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण की तस्वीर न्यायालय के फैसले से पूरी तरह बदल जाएगी। नए आरक्षण में बड़ा उलटफेर दिखाई पड़ेगा। कम वोट पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई पंचायतों को फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फैसले से पंचायतों में कहीं जश्न तो कहीं मायूसी है। दावेदार नए जोश से पंचायत चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। कोर्ट के फैसले से वर्ष 2015 के आरक्षण को मूल या आधार वर्ष मानकर वर्ष 2021 का आरक्षण होगा। अभी वर्ष 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण किया गया है।
शासन की आरक्षण नीति के मुताबिक वर्ष 1995 से वर्ष 2015 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुई पंचायत पहले अनुसूचित जाति श्रेणी में आरक्षित की गई हैं। अनेक ऐसी पंचायतों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया था जिनमें अनुसूचित जाति के नाम मात्र को वोट हैं। इस पर ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में आपत्ति दर्ज कराई हैं। फैसले के बाद यह प्रक्रिया पूरी पलट जाएगी। पंचायतों का आरक्षण घोषित होने के बाद से पंचायतों में बैठक हो रही थीं। लोग चुनाव बहिष्कार तक करने की बात कर रहे थे। हर कोई 15 मार्च के कोर्ट के फैसले की ओर निगाह लगाए बैठा था। फैसले के बाद इन पंचायतों में जश्न का माहौल है। जो दावेदार मनमाफिक आरक्षण नहीं आने पर चुनाव लड़ने की आस छोड़ चुके थे, उनमें नया जोश आ गया है।
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जिले की 250 पंचायतों पर असर
जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। इनमें 250 ऐसी पंचायत हैं जो 1995 से वर्ष 2015 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुई हैं। आरक्षण नियमों के अनुसार इन्हें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। कोर्ट के फैसले के बाद इन पंचायतों का आरक्षण बदलेगा। साथ ही मौहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की इच्छावाला, हल्दौर ब्लॉक की सल्लाहपुर जैसी तीन चार वोट पर ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पंचायतों को बड़ी राहत मिलेगी। अब आरक्षण नए सिरे से होगा। फैसले के मुताबिक वर्ष 2015 आरक्षण का मूल वर्ष होगा। इसके अनुसार यह तय बताया जा रहा है कि जिले की जो पंचायत वर्ष 2015 में जिस श्रेणी में आरक्षित रह चुकी है, वह वर्ष 2021 में उस श्रेणी में आरक्षित नहीं होगी। इसको देखते हुए प्रस्तावित आरक्षण में बड़ा उलटफेर दिखाई पड़ेगा।
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आरक्षण की समय सीमा हो सकती है कम
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि शासन के आदेश आने पर ही आरक्षण की नई प्रक्रिया शुरू होगी। कोर्ट ने 25 मार्च तक आरक्षण पूरा करने को कहा है। इसलिए आरक्षण करने, आपत्ति देने, निस्तारण तथा अंतिम आरक्षण सूची के प्रकाशन आदि का कुल समय कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हल्दौर ब्लॉक के जिला पंचायत वार्ड का परिसीमन के कारण क्रमांक बदला है। इसलिए वहां नई प्रक्रिया से वार्ड के आरक्षण में पेंच फंस सकता है। कहा कि आरक्षण प्रक्रिया को लेकर शासन के आदेश मिलने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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