ज्ञान-विज्ञान, वैदिक संस्कृति को व्यवहार में लाएं
नजीबाबाद। ज्ञान-विज्ञान और वैदिक संस्कृति को व्यवहार में लाने से जीवन सुखद और सार्थक बनता है। गुरुकुल आर्ष कन्या विद्यापीठ के रजत जयंती समारोह में यह बात आर्य समाज विद्वानों ने कही।
गुरुकुल आर्ष कन्या विद्यापीठ का रजत जयंती समारोह हवन-यज्ञ और संगोष्ठी के साथ आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ में आहुति दी गई। आचार्या सूर्या देवी चतुर्वेदा ने वैदिक संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, आयुर्वेद और होम्योपैथी की चर्चा की। उन्होंने बल, बुद्धि, विद्या और तेज की उन्नति के साथ भारतीय संस्कृति को जीवन का मूल आधार बनाने की सलाह दी। प्रो. कुमार शास्त्री, योग आचार्य कर्मवीर ने बालिकाओं को संस्कारित शिक्षा, समाज को वैदिक संस्कृति से जोड़ने के लिए वातावरण निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। गुरुकुल आर्ष कन्या विद्यापीठ की छात्राओं ने गायत्री मत्रोच्चारण के साथ वैचारिक संगोष्ठी में प्रतिभाग करते हुए अपने भीतर छिपी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। कार्यक्रम में कृतिका, उपासना, भावना, कविता, विद्या, प्रज्ञा, अमृता, सुनैना, समृति, स्नेहा, लता, जागृति सहित अनेक छात्राओं ने भाग लिया।