हास्य कविताओं के जरिये हिंदी का बढ़ा रहे गौरव
नगीना। नगीना के हुड़दंग नगीनवी हास्य कविताओं के माध्यम से पूरे देश भर में हिंदी को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देने की कला रखने वाले हुड़दंग नगीनवी ने अपना पूरा जीवन हास्य कविताओं को लिखने और सुनाने में खपा दिया।
2 फरवरी 1959 को नगीना के मोहल्ला नाल बंदान निवासी एडवोकेट जयप्रकाश अग्रवाल के घर जन्म लेने वाले हुड़दंग नगीनवी के पिता ने नहीं सोचा होगा कि वह अपने जिस बच्चे का नाम विनीत गर्ग रख रहे हैं, वह बच्चा एक दिन अपनी हास्य कविताओं के जरिये काव्य मंचों पर हुड़दंग नगीनवी के नाम से जाना जाएगा। अपने बचपन के हुड़दंग को वास्तविक जीवन में अपनाने वाले हुड़दंग नगीनवी आज नगीना ही नहीं बल्कि पूरे देश में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। देशभर में रेडियो, टेलीविजन, पुस्तकों व कवि सम्मेलनों के माध्यम से साहित्यिक परिवारों में अपनी पैठ बनाने वाले हास्य कवि हुड़दंग नगीनवी अपनी हास्य कविताओं के बल पर देशभर में नाम कमा रहे हैं।
हुड़दंग नगीनवी बताते हैं कि उन्होंने पूरे देश भर में करीब एक हजार से अधिक छोटे व बड़े कवि सम्मेलनों में अपनी हास्य रचनाओं के बदौलत लोगों को हंसाने का काम किया है। बताया कि कविता लिखने का शौक उन्हें अपने पिता जय प्रकाश अग्रवाल से मिला। 18 वर्ष की आयु से उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया था। सबसे पहले वह समाचार पत्रों के कॉलम में छपने के लिए अपनी कविता भेजते थे, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। दूरदर्शन पर उन्होंने कई प्रोग्रामों में हिस्सा लिया। जिसमें वाह वाह, हंसते रहे, आपका व्यक्तित्व आदि प्रोग्रामों में उन्होंने हास्य कविताएं सुनाकर लोगों को लोटपोट किया। लखनऊ दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले सत्यवादी हरिश्चंद्र सीरियल में उन्होंने भगवान शंकर का रोल किया था। हुड़दंग बताते हैं की रेडियो के विभिन्न केंद्रों पर वह करीब 50 बार अपना प्रोग्राम दे चुके हैं। उनका कहना है कि वह हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अब तक 13 पुस्तकें लिख चुके हैं।