शेरकोट। पोषक नहर का पानी खो नदी में डायवर्ट किए जाने से हजारों बीघा पलेज की फसल बर्बाद हो गई। पलेज पानी में डूब जाने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। दरअसल पोषक नहर को बंद करने के लिए पानी खो नदी में छोड़ना पड़ा। तीन दिन पहले नहर में एक व्यक्ति के डूबने की आशंका में उसकी तलाश के लिए नहर का पानी खो नदी में छोड़ा गया है।
शेरकोट में खो नदी के बैराज से पोषक नहर सिंचाई के लिए निकलती है। इस पोषक नहर में पानी बह रहा था। शनिवार शाम से अधिकारियों ने व्यक्ति को खोजने के लिए पोषक नहर को बंद कराया। ऐसे मेें नहर में जाने वाले पानी को रोकने के बाद खो नदी में प्रवाहित कर दिया गया। खो नदी के किनारे किसानों ने पलेज लगा रखी है। अचानक आए पानी से किसानों को अपने खीरे, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा और अन्य सब्जी तोड़ने को मौका नहीं मिल पाया और फसल बर्बाद हो गई। शेरकोट से लेकर खो नदी हादकपुर, पालकी एमन, तिपरजोत, सिपाहियोवाला जाकर रामगंगा में मिल जाती है। कई लोगों ने पलेज लगा रखी है। अबरार, बंटी सैनी, नरपाल सैनी का कहना है कि उनका कई क्विंटल खीरा पानी के तेज प्रवाह में बह गया। खरबूजे और तरबूज की फसल को भारी नुकसान हुआ है। ऐसा ही इकरामुद्दीन, सुवराती, नरेश कुमार का भी कहना है।
नहर में जारी है धर्मेंद्र की तलाश
तीन दिन पहले लापता मोहल्ला तैयब सराय निवासी धर्मेंद्र सैनी (48) की पोषक नहर में डूबने की आशंका है। उसकी चप्पल नहर के पास मिल थी। धर्मेंद्र सैनी का रविवार को अभी तक पता नहीं लग सका है। गोताखोरों की मदद से तलाशने का प्रयास जारी है। बैराज का पानी नहर में जाने से रोकने के बाद तलाश में आसानी होगी।