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शासन से धान की काली हुई फसल को खरीदने के लिए मांगी अनुमति

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काली हुई धान की फसल खरीदने की मांगी अनुमति
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बिजनौर। बारिश से धान काला होने पर किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों को नुकसान में राहत देने के लिए प्रशासन ने थोड़ी छूट देने की कोशिश की है। आठ प्रतिशत तक काले धान वाली फसल को खरीदने के लिए अनुमति मांगी गई है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। हालांकि किसानों का कहना है कि धान की आठ प्रतिशत से अधिक फसल काली हो गई है। सरकार को और ज्यादा छूट देनी चाहिए।
धान की तैयार फसल पर खूब बादल बरसे और फसल पानी में डूब गई। खादर में तो कई जगह किसानों को खेत में पानी में डूबी फसल को बुग्गी आदि से निकालना पड़ा। फसल सूखी तब तक धान काला पड़ गया। धान तो सूख गया, लेकिन अब किसान के सामने सबसे बड़ी समस्या उसे बेचने की है। जिले में 55 हजार हेक्टेयर से अधिक धान बोया जाता है। जिले में धान की खरीद का लक्ष्य 52 हजार 300 मीट्रिक टन रखा गया है। धान की फसल की कटाई जिले में शुरू ही हुई थी कि बारिश पड़ गई। करीब 25 हजार हेक्टेयर में मोटा धान बोया जाता है जो बिक्री के लिए पूरी तरह धान क्रय केंद्रों पर ही जाता है। इस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नियम के अनुसार पांच प्रतिशत तक काले या लकड़ी व अन्य कूड़े वाली फसल को केंद्रों पर खरीदा जा सकता है। खाद्य विपणन विभाग ने काले धान की फसल को देखते हुए छूट को आठ प्रतिशत तक करने की मांग की है। हालांकि किसान इसे बहुत कम बता रहे हैं।
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गांव मानियावाला निवासी किसान पाल सिंह ने 13 बीघा धान बोया था। उनका कहना है कि धान आठ प्रतिशत से अधिक काला हो गया है। कहीं-कहीं तो लगभग आधी फसल ही काली हो गई है। सरकार को मौसम से हुए नुकसान को देखना चाहिए और धान सभी तरह का धान खरीदना चाहिए। अगर ऐसा न हुआ तो किसानों को बहुत नुकसान होगा। गांव माधोवाला निवासी नरेश कुमार का छह एकड़ धान बारिश की वजह से काला हुआ है।
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नरेश कुमार के अनुसार सरकार या तो धान खरीदे या फसल की लागत के अनुसार मुआवजा दे। किसानों को नुकसान से बचाना सरकार का काम है।
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छूट बढ़ाने की मांग की
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सतीश कुमार द्विवेदी के अनुसार धान की आठ प्रतिशत तक काली फसल को खरीदने की अनुमति मांगी गई है। शासनादेश के अनुसार ही धान की खरीद की जाएगी।
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