- साइबर अपराधियों ने स्टोन क्रशर स्वामी से कर ली नौ लाख 37 हजार की ठगी
- बीमा की किस्त जमा कराने और रिफंड का दिया झांसा
- महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश की बैंक शाखाओं में गया ठगी का पैसा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। साइबर अपराधियों ने अब स्टोन क्रशर स्वामी को ठग लिया। दरअसल बीमा की किस्त जमा कराने और नौ लाख का रिफंड देने का झांसा देकर आरोपियों ने खातों में रकम ट्रांसफर करा ली। करीब नौ लाख 37 हजार रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
नजीबाबाद के मोहल्ला मकबरा निवासी सुधांशु अग्रवाल ने नजीबाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। जो कि कहा गया कि उन्होंने साल 2024 में बीमा कराया था। जो कि किस्त जमा नहीं करने के बाद बंद हो गया। दो जुलाई को उनके पास एक युवती का फोन आया, जिसने बीमा कंपनी की कर्मचारी बताते हुए बात की। जिसने कहा कि उनकी पॉलिसी लैप्स हो गई है। प्रीमियम यानी किस्त जमा करने पर पॉलिसी फिर से चालू करने की बात कही। उसकी बातों में आकर तीन जुलाई को करीब 91 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद फिर से फोन आया, जिसके बाद छह जुलाई को 92 हजार जमा कराए गए। फिर आठ जुलाई को भी रकम ट्रांसफर की, नौ जुलाई को एक लाख रुपये जमा कराए गए। दस जुलाई को 90 हजार, 13 जुलाई को 25 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। 14 जुलाई को दो लाख पैंसठ हजार और 15 जुलाई एक लाख अस्सी हजार रुपये आरोपियों के बताए बैंक खातों में जमा कराए गए। इस तरह कुल नौ लाख 37 हजार 682 रुपये उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। बाद में बीमा कंपनी में पता किया तो रकम जमा ही नहीं हुई थी। आरोपियों के फोन नंबर भी बंद आने लगे। जिस पर पीड़ित को साइबर ठगी का एहसास हुआ।
पीड़ित ने बताया कि उक्त रकम पत्नी और बेटी के बैंक खाते से ट्रांसफर की है। प्राथमिक जांच में सामने आया कि अमरावती, मुंबई सेंट्रल और गोरखपुर के बैंक खातों में उक्त पैसा गया है।
एएसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। धोखाधड़ी का मामला है, जल्द ही जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
जीएसटी का हवाला देकर भी जमा कराए 1.80 लाख
आरोपियों ने किस्त बताकर रकम जमा कराई, इसके बाद बोनस और रिफंड का झांसा देने लगे। बाद में कहा कि पॉलिसी के नियम के तहत दस लाख रुपये रिफंड कर रहे हैं। मगर इससे पहले जीएसटी देनी पड़ेगी। झांसे में आए स्टोन क्रशर स्वामी ने जीएसटी का बताया गया एक लाख अस्सी हजार रुपये भी जमा कर दिया।
केस-1: डिजिटल अरेस्ट का डर, महिला ने जान दे दी
बिजनौर में साइबर अपराध का सबसे संवेदनशील मामला 30 अप्रैल 2026 को सामने आया। साइबर ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एक महिला को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में होने का झांसा दिया। परेशान महिला ने आत्महत्या कर ली थी। बाद में प्राथमिकी दर्ज हुई और आज भी इस मामले की जांच चल रही है।
केस 2 : हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नाम पर देशभर में ठगी
बिजनौर पुलिस ने नौ जुलाई को हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के नाम पर चल रहे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया। गिरोह ने सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार कर देशभर के वाहन स्वामियों से ऑनलाइन भुगतान कराया। लोगों को नंबर प्लेट बुकिंग के नाम पर ठगा जाता था, जबकि प्लेट जारी ही नहीं होती थी। पुलिस ने कार्रवाई कर गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया और लैपटॉप, मोबाइल, बैंक दस्तावेज समेत डिजिटल साक्ष्य बरामद किए।
केस -3: डॉक्टर का अपॉइंटमेंट बुक कराने के नाम पर 3.25 लाख की ठगी
19 जुलाई 2026 को चांदपुर की चिकित्सक डॉ. नवोदिता चौधरी ऑनलाइन डॉक्टर अपॉइंटमेंट से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर रहीं थीं। इसी दौरान साइबर ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर मोबाइल पर एक लिंक/एप डाउनलोड कराया और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर ली। कुछ ही देर में उनके खाते से 75 हजार रुपये निकाल लिए गए। इसके बाद ठगों ने उनके पति एवं अमरोहा के डिप्टी सीएमओ डॉ. आमोल कुमार सिंह के खाते से भी ढाई लाख रुपये पार कर दिए।