नांगलसोती क्षेत्र में हर वर्ष लगभग 50 कोल्हुओं का संचालन होता है, जहां बड़े पैमाने पर गन्ने की पेराई कर विशेष गुणवत्ता का गुड़ तैयार किया जाता है। नांगल का गुड़ अपनी मिठास और छोटे आकार के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
नांगलसोती। नांगलसोती और आस-पास के क्षेत्र में प्रतिवर्ष करीब 50 कोल्हुओं का संचालन होता है। बुधवार को नांगल में एक कोल्हू का संचालन हुआ। कोल्हू संचालन में शुरुआत में किसानों से करीब 300 रुपये क्विंटल गन्ना खरीदा। क्षेत्र में अन्य कोल्हुओं के संचालन की भी तैयारी शुरू हो गई है। पेराई सत्र के दौरान क्षेत्र के कोल्हुओं पर प्रतिदिन करीब छह हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर 500 से 700 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है।
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कोल्हू संचालक राजवीर काकरान, नितिन, अनमोल, मोनू ने बताया कि दशहरा तक अधिकांश कोल्हुओं का संचालन हो जाएगा।
मिठास और छोटे आकार के लिए प्रसिद्ध है नांगल का गुड़
नांगल क्षेत्र के गुड़ का मूल्य किरतपुर मंडी में अन्य गुड़ के मुकाबले अधिक होता है। आस-पास के प्रदेशों के अलावा नांगल क्षेत्र का गुड़ विदेशों तक सप्लाई किया जाता है। दिल्ली सहित कई प्रदेशों से लोग ऑर्डर पर गुड़ बनवाने के लिए नांगल के कोल्हुओं पर पहुंचते हैं।