जिले में हर महीने मिल रहे अतिकुपोषित बच्चे
बिजनौर। जिले में कुपोषण का दंश अब तक मिट नहीं पाया है। हाल ये है कि जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या से ज्यादा संख्या आंगनबाड़ी कर्मचारियों की है। कुपोषण को खत्म करने के लिए तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन हर महीने अतिकुपोषित बच्चे मिलते ही हैं।
कुपोषण को खत्म करने के लिए पहले सरकार द्वारा नौनिहालों को दलिया व हॉट कुक दिया जाता था। बाद में एनजीओ ने बच्चों को पोषाहार बांटा और अफसरों ने भी गांव गांव जाकर दो-दो अतिकुपोषित बच्चों को गोद लिया। कुपोषण के खिलाफ अभियान अब भी चल रहा है, लेकिन इसके बाद भी कुपोषण से पूरी तरह आजादी मिलती नहीं दिख रही है। जिले में करीब 3200 आंगनबाड़ी केंद्र है। इसमें एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व एक सहायिका तैनात रहती है। इनका काम अभिभावकों को कुपोषित बच्चों के खानपान के बारे में जागरूक करना और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। जिले में छह हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका हैं, जबकि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या पांच हजार के करीब है। काफी प्रयास के बाद भी बच्चों से कुपोषण को खत्म नहीं किया जा पा रहा है। हालांकि कुल बच्चों की संख्या के अनुपात में कुपोषण की दर दो प्रतिशत से भी कम है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया ह्रै।
जिले में अतिकुपोषित बच्चों पर एकनजर
परियोजना कुल बच्चे अतिकुपोषित बच्चे
अफजलगढ़ 18458 210
बिजनौर 7597 146
देवमल 23733 279
धामपुर 27071 314
हल्दौर 9627 246
जलीलपुर 28120 86
झालू 7506 78
किरतपुर 21672 292
कोतवाली 32844 1868
नहटौर 22771 477
नजीबाबाद 35714 232
नूरपुर 28434 228
स्योहारा 21666 407
कुल 285213 4863
नोट: (आंकड़े विकास भवन से लिए गए हैं।)
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लगातार कर रहे प्रयास
जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा के अनुसार कुपोषण हर महीने देखा जाता है। कई बार बच्चों का स्वास्थ्य खराब होने आदि वजह से भी उनका वजन कम हो जाता है और वे कुपोषित श्रेणी में दर्ज हो जाते हैं। कुपोषण को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।