बिजनौर में बैराज केे पास गंगा की धारा का निरीक्षण करती लखनऊ की टीम। स्रोत विभाग
बिजनौर। यूं तो गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। मगर बैराज के तटबंध पर कटान की आशंका को लेकर कटान निरोधी कार्य लगातार जारी हैं। लकड़ी के खटौले बनाकर, इनमें पेड़-पौधे भरकर गंगा में लगाए जा रहे हैं ताकि तटबंध को गंगा की धारा के तेज वेग से बचाया जा सके। उधर लखनऊ से पहुंची टीम ने भी गंगा में ड्रेजिंग कर तैयार किए गए जलमार्ग से पानी की निकासी और गहराई आदि को परखा।
सोमवार शाम बिजनौर बैराज से गंगा में 83 हजार क्यूसेक गंगा में बहकर निकला जबकि जलस्तर 218.30 मीटर दर्ज किया गया। जबकि रविवार को बैराज से करीब 94 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था और जलस्तर 218.40 बना हुआ था। गंगा में उफान कम हुआ है मगर कटान का खतरा लगातार बना हुआ है। सिंचाई विभाग की ओर से सोमवार को भी बैराज के तटबंध पर कटान निरोधी कार्य का सिलसिला जारी रहा।
पिछले कई दिनों से परक्यूपाइन स्टड तटबंध और गंगा की धारा के बीच रखे जा रहे थे। अब सोमवार को लकड़ी के खटौले बनाकर उनमें पेड़-पौधे भरकर धारा के मुहाने और तटबंध के बीच रखे गए ताकि गंगा की तेज धारा का असर तटबंध पर न पड़ने पाए और धारा का रुख बदलता रहे। बता दें कि गंगा की तेज धारा सीधे तटबंध से टकरा रही थी। ऐसे में कटान की आशंका बनी हुई थी, तटबंध को नुकसान नहीं होने पाए, इसके लिए पिछले कई दिनों से काम चल रहा है।
बदल गया है धारा का रुख : मध्य गंगा नहर खंड पांच के जेई घनश्याम ने बताया कि पहले गंगा की धारा की टक्कर सीधे तटबंध पर लग रही थी मगर अब गंगा ने पश्चिम की दिशा में जमा सिल्ट में कटान करना शुरू कर दिया है। जिसके चलते तटबंध पर सीधी टक्कर नहीं लग रही है। फिर भी खटौले बनाकर गंगा में तटबंध के अंदर की ओर रखे जा रहे हैं।
बिजनौर में बैराज केे पास गंगा की धारा का निरीक्षण करती लखनऊ की टीम। स्रोत विभाग