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कलक्ट्रेट में बने सामुदायिक शौचालयों में लगे ताले, जनता परेशान

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बिजनौर कलक्ट्रेट में बने शौचालय में लगा ताला। - फोटो : BIJNOR
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कलक्ट्रेट में बने सामुदायिक शौचालयों में लगे ताले, जनता परेशान
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बिजनौर। कहीं और चले जाइए... शौचालय पर लटके हुए ताले यही संदेश दे रहे हैं। लाखों रुपये की सरकारी रकम खर्च करने के बाद भी मकसद पूरा नहीं हो रहा। दरअसल बिजनौर शहर में विकास भवन और कलक्ट्रेट में बनाए गए सामुदायिक शौचालय को आज तक जनता के लिए नहीं खोला जा सका। ऐसे में जरूरत पड़ने पर सरकारी दफ्तरों में आने वाले लोग जाएं तो जाएं कहां?
विकास भवन के मुख्य गेट के पास डूडा की ओर से शुलभ शौचालय का निर्माण कराया गया था। निर्माण के बाद से ही इसे उपयोग में नहीं लाया जा सका। शौचालय के गेट पर ताला लटका हुआ है। ताले पर लग चुका जंग यह पुख्ता करने के लिए काफी है, यह ताला कभी नहीं खुलता।
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बता दें कि विकास भवन में अपनी समस्याओं को लेकर रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं। इन्हें शौचालय जाने की जरूरत पड़े तो जगह नहीं मिलेगी। इसके अलावा सिर्फ ताला लगा होने की वजह से विकास भवन के पिछली ओर दिव्यांग शौचालय भी अनुपयोगी बना हुआ है। ताज्जुब की बात यह कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के इस्तेमाल के अभियान की शुरुआत विकास भवन से ही होती है। लेकिन, यहां शौचालय पर लटके हुए ताले दीये तले अंधेरा की कहावत को चरितार्थ करने के लिए काफी हैं।
यह हाल तब है जब स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अफसर ने ग्राम पंचायतों को चेतावनी जारी की थी कि गांव के सामुदायिक शौचालय बंद नहीं मिलने चाहिए। लेकिन विकास भवन के शौचालय को खुलवाने पर गौर नहीं हुआ। उधर कलक्ट्रेट परिसर में नगर पालिका की ओर से बनवाए गए शौचालय का ताला भी नहीं खुल पाया है। ऐसे में गांव देहात से आने वाली जनता शौचालय कहां ढूंढेगी।
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आमतौर पर शौचालय खुला रहता है। अगर किसी ने ताला लगा दिया है तो उसे खुलवा दिया जाएगा। शौचालय बंद नहीं होगा - केपी सिंह, सीडीओ
हमने कलक्ट्रेट में शौचालय का निर्माण कराकर निर्वाचन कार्यालय के सुपुर्द कर दिया था। अब ताला क्यों लगा है यह तो विभागीय अधिकारी ही बता पाएंगे -मनोज कुमार, ईओ, नगर पालिका
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