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चौधरी साहब के सहपाठी थे लाखन सिंह ढाका

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चौधरी साहब के सहपाठी थे लाखन सिंह ढाका
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कोतवाली देहात। गांव महेश्वरी जट में एक परिवार में आज भी चौधरी चरण सिंह का परिवार के सदस्य की भांति स्मरण किया जाता है। परिवार के मुखिया स्वतंत्रता सेनानी स्व. लाखन सिंह ढाका चौधरी साहब के सहपाठी रहे। गांव महेश्वरी जट निवासी लाखन सिंह ढाका ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था।
महेश्वरी जट में जन्मे लाखन सिंह ने सन 1923 में चौधरी चरण सिंह के साथ आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। लाखन सिंह के पौत्र संजय ढाका बताते हैं कि उनके दादा जी पर चौधरी चरण सिंह का गहरा प्रभाव था जो जीवन पर्यंत बना रहा। 1930 में नमक आंदोलन के समय चौधरी चरण सिंह ने हिंडन नदी पर नमक कानून तोड़ा था। उस समय उनके दादा जी भी स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े । 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय लाखन सिंह ढाका ने नगीना में अंग्रेज सरकार के विरुद्ध आंदोलन में हिस्सा लिया। अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था।
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आजादी के बाद लाखन सिंह के देशहित में किए गए योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया। देश की आजादी के बाद जहां चौधरी चरण सिंह राजनीति में सक्रिय हो गए, वहीं, लाखन सिंह समाजसेवा में जुट गए। फिर भी वे सदैव चौधरी चरण सिंह के प्रति कृतज्ञ रहे। लाखन सिंह के पुत्र चंद्रपाल इकलौते पुत्र थे। उनके चार पुत्र हैं। आज भी यह परिवार चौधरी चरण सिंह को परिजन की तरह मानता है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा देश के प्रधानमंत्री रहते हुए भी चौधरी चरण सिंह लाखन सिंह को याद करते रहते थे। बिजनौर से जाने वाले नेताओं से लाखन सिंह की कुशल क्षेम पूछना नहीं भूलते थे। इसी तरह लाखन सिंह भी चौधरी चरण सिंह के साथ बिताए समय को तथा उनसे जुड़ी अनेक बातें परिजनों और ग्रामवासियों को बताते थे। लाखन सिंह के प्रपौत्र अमित कुमार ढाका बताते हैं कि उनके परदादा जी 1984 में मरने से पूर्व तक चौधरी चरण सिंह जी के साथ बिताए समय को याद करते रहे। अमित बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह द्वारा किसान हित में कि ए गए कार्य आज भी प्रासंगिक हैं।
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