कारसेवकों ने मालीपुर में तोड़ दी थी अस्थायी जेल
बिजनौर। अयोध्या में कार सेवा के लिए 30 साल पहले युवाओं में जोश भर गया था। हिंदूवादी संगठनों से जुड़े तमाम नेता अयोध्या कूच कर गए थे। रास्ते में हर जगह कहीं पुलिस से मुकाबला करना पड़ा तो कहीं वाहन नहीं मिले। कारसेवकों को गिरफ्तार गांव मालीपुर की अस्थायी जेल में रखा गया, जिसे उन्होंने रात में तोड़ दिया था। पैदल चलकर ये अयोध्या की धरती पर पहुंच गए। ढांचा गिराने में शामिल न हो पाने का इन लोगों को अब भी मलाल है।
अयोध्या में कारसेवा के लिए 1990 में लोगों में खूब जुनून भरा था। हर कोई अयोध्या जाने के लिए उत्सुक था। बिजनौर से राजीव सोती तिलकधारी, मयंक मयूर, विजय खन्ना, संजय शर्मा, अजीत अग्रवाल, भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष नीरज शर्मा, मुकेश शर्मा, राकेश त्यागी, आरएसएस के विभाग सह संघचालक महेशपाल सिंह 17 अक्तूबर 1990 को दीपावली के दिन अयोध्या जाने के लिए बालावाली से जनता एक्सप्रेस से कूच कर गए। अयोध्या से पहले मजनावा रेलवे स्टेशन पर ये ट्रेन से उतरे। वहां से गांव सुहावल पहुंचे। सुहावल गांव में जंगल के रास्ते अयोध्या के लिए निकले। मालीपुर गांव में अस्थायी जेल में इन्हें गिरफ्तार कर रखा गया। वहां उन्होंने जेल तोड़ दी। बाहर खड़ी बसों में बैठकर अयोध्या की तरफ कूच कर गए। अकबरपुर से पहले पुलिस ने फिर उन्हें घेर लिया। फिर ये नहर में पानी के रास्ते वहां से निकले और अकबरपुर पहुंचे। आठ आदमियों की टोली बनाकर ये वहां चल रहे थे। एक नवंबर को अयोध्या पहुंचे। दो नवंबर को कारसेवा के नजदीक तो पहुंचे पर ढांचे तक नहीं पहुंच पाए। इस बात का इन्हें आज भी मलाल है।
27 नवंबर 1992 को ये अलग अलग टोलियों में अयोध्या के लिए कूच किया। पर छह दिसंबर ढांचा गिराने में शामिल नहीं हो पाए। ये ढांचें तक नहीं पहुंच पाए। इसका उन्हें मलाल है। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक चांदपुर निवासी अनिल पांडेय 1990 में कारसेवा में भाग लेने के लिए अयोध्या की सीमा तक पहुंच गए थे। वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और इलाहाबाद की जेल में भेज दिया गया। तीन दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। नैनी जेल में अनिल पांडेय पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ एक ही बैरक में रहे थे। अनिल पांडेय को अयोध्या में ढांचे में नहीं पहुंच पाने का मलाल रहा। छह दिसंबर 1992 से पहले भी वे अयोध्या पहुंच गए थे पर वहां ढांचा गिराने के वक्त आगे तक नहीं पहुंच पाए थे। नजीबाबाद के राजपाल चौहान में भी इस बात का जुनून था कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बने। वे 16 नवंबर 1992 को बरेली व शाहजहांपुर के लोगों के साथ अयोध्या पहुंच गए। छह दिसंबर की सुबह अयोध्या में विवादित ढांचा गिराना शुरू हुआ तो वे उसमें शामिल रहे।