बिजनौर। केंद्र सरकार ने नए साल से कई प्रोडेक्ट्स पर जीएसटी की दरें पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी है। जो प्रोडेक्ट्स अभी तक जीएसटी की श्रेणी में नहीं आते थे, उन पर भी जीएसटी की दर लागू हो गई, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। हालांकि कई जगह कंपनी ही जीएसटी का भुगतान करेगी लेकिन आखिरकार वह ग्राहक के खाते में ही आएगा।
मो. आसिफ ने बताया कि जीएसटी की दरें बढ़ने से आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा। जो सामान अभी कम कीमत में मिलता था, वह अब उससे अधिक कीमत में मिलेगा। इसके साथ ही एटीएम से पांच बार से अधिक पैसा निकालने पर 21 रुपये के साथ जीएसटी लगेगी, इसका असर आम आदमी पर ही पड़ेगा।
कुलदीप सिंह ने कहा कि सरकार के इस फैसले का फायदा नहीं होगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर ही इसका असर पड़ेगा। अब डाकखाने में अपना पैसा ही जमा करने पर टैक्स लिया जाएगा। डाकखाने में दस हजार जमा करने पर 25 रुपये देने होंगे। लोगों की आय नहीं बढ़ रही है और महंगाई लगातार जेब ढीली कर रही है।
धीरज पाल ने बताया कि नए साल पर 1500 रुपये की कीमत के जूते खरीदे, जो करीब 200 रुपये महंगे मिले। सरकार ने जूतों-चप्पलों पर जीएसटी की दरें 12 प्रतिशत कर दी है। इसका असर आम लोगों पर ही पड़ रहा है।
ब्रजेश कुमार ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया है। जीएसटी की दरें बढ़ने से आम लोगों पर इसका बोझ पड़ेगा। भले ही कुछ सामानों पर सरकार कंपनी से ही जीएसटी ले, लेकिन कंपनी जनता से पैसा वसूल करेगी। फूड डिलिवरी करने वाली जोमेटो और स्वीगी कंपनी अब सरकार को 5 प्रतिशत जीएसटी देगी।
वासुदेव सिंह ने कहा कि सरकार के ये फैसले गलत हैं। इसकी वजह से लोगों का विश्वास सरकार से उठता जा रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच गरीबों को परिवार का पेट पालना भी भारी हो रहा है। सरकार को गरीबों की ओर भी ध्यान देना चाहिए।