समाजशास्त्र में प्रकार्यवाद उपागम का महत्वपूर्ण स्थान : प्रो. राजेश
चांदपुर (बिजनौर)। गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शहीद मंगल पांडेय राजकीय महिला पीजी कॉलेज मेरठ, सेठ रंग लाल कोठारी राजकीय पीजी कॉलेज राजसमंद राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में समाजशास्त्र एवं सामाजिक-मानवशास्त्र में प्रकार्यात्मक सिद्धांत विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान हुआ।
लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष व मुख्य वक्ता प्रो. राजेश मिश्रा ने आगस्ट काम्टे से लेकर मैलिनोवास्की एवं रैडक्लिफ ब्राउन तक संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक सिद्धांत में आए बदलाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाजशास्त्र में प्रत्यक्षवाद के साथ ही प्रकार्यवाद उपागम का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रकार्यवाद यह मानता है कि समाज की क्रियाएं व्यवस्थित तरीके से चलती हैं। इसीलिए प्रकार्यवाद के समर्थक समाज को एक व्यवस्था के रूप में देखते हैं।
डॉ. लता कुमार ने कहा कि वह समाजशास्त्र के महान पुरोधा हैं, जो भारत में निरंतर समाजशास्त्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि मुख्य वक्ता का व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा, क्योंकि उन्होंने सामाजिक परिवेश के समस्त पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सिद्धांत को समझाने का प्रयास किया है। एकेएम पीजी कॉलेज सीतापुर की डॉ. पुष्पा गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुचित्रा शर्मा ने किया। आयोजन समिति में डॉ. अनिल कुमार वर्मा, डॉ. अखिलेश, ज्ञानेंद्र सिंह व सुरेंद्र सिंह रहे। एपी सेन मेमोरियल गर्ल्स पीजी कॉलेज लखनऊ की डॉ. अंशु केडिया के मार्गदर्शन व डॉ. अंजू सिंह प्राचार्या मेरठ, डॉ. रचना तैलंग प्राचार्या राजसमंद व डॉ. अमित कुमार सिंह प्राचार्य चांदपुर के संरक्षण में आयोजित व्याख्यान में डॉ. साधना, डॉ. जैबा नाज, डॉ. अभिषेक सिंह चौहान, डॉ. रेखा रानी, डॉ. कीर्ति गौड़, डॉ. अनामिका सिंह आदि मौजूद रहे।