बिजनौर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) बिजनौर शाखा की बैठक हुई, जिसमें रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्यता अनिवार्य रूप से लेने का विरोध जताया गया। निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब एवं ब्लड बैंक को आर्थिक सहयोग देने के निर्देशों का विरोध किया।
बैठक में रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्यता लेने एवं आर्थिक योगदान करने के संबंध में जारी निर्देशों पर विस्तृत चर्चा की गई। सभी चिकित्सकों ने कहा कि किसी भी संस्था की सदस्यता या आर्थिक योगदान को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। इसे स्वैच्छिक ही रखा जाना चाहिए। आईएमए पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक प्रावधान के इस प्रकार का दबाव संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। राज्य स्तर पर भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताने की बात कही।
आईएमए बिजनौर ने कहा कि वह सदैव जनसेवा एवं मानवीय कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। रेडक्रॉस सोसायटी जैसे संगठनों को स्वैच्छिक सहयोग देता रहा है। उन्होंने सदस्यता की स्वैच्छिकता, अनिवार्य आर्थिक योगदान का विरोध, व्यावसायिक स्वतंत्रता, राज्य स्तरीय संवाद आदि बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस प्रकार के दबावपूर्ण निर्देश जारी रहते हैं तो आईएमए अपने सदस्यों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। इस मौके पर आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सीपी सिंह, सचिव अमित नारायण, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. विभू शर्मा आदि मौजूद रहे।
इस संबंध में रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन टीकम सिंह सेंगर ने बताया कि राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर सदस्यता लेने के लिए कहा जा रहा है। नर्सिंग होम के लिए 10 रुपये सदस्यता शुल्क पांच साल के लिए है। जबकि, अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए पांच साल का 25 हजार रुपये सदस्यता शुल्क शासन से ही निर्धारित किया गया है।