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Bijnor News: मोबाइल में निकाल दिया समय, अब परीक्षा आई तो चढ़ गया फोबिया

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बिजनौर। बच्चा किताबों के अलावा मोबाइल से भी पढ़ाई कर अच्छे अंक लाकर नाम रोशन करें, परिवार का यह सपना धीरे-धीरे टूट रहा है। जी हां, पूरा साल बच्चों ने मोबाइल पर पढ़ाई की जगह रील देखने में निकाल दिया। अब परीक्षा नजदीक आई तो उन्हें डर सता रहा है। मेडिकल कॉलेज के मनकक्ष में इस समस्या हर सप्ताह पांच बच्चे तक पहुंच रहे हैं।
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मोबाइल का इस्तेमाल पढ़ाई में किया जाए तो यह छात्र हित में है। मगर, बच्चे फोन का इस्तेमाल पढ़ाई में न करके रील देखने, गेम खेलने में कर रहे हैं। इसकी वजह से बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं। वहीं, अब बोर्ड परीक्षा नजदीक आने वाली हैं। ऐसे में उनकी चिंता बढ़ने लगी है। परीक्षा के डर की वजह से विद्यार्थियों को घबराहट, सिर दर्द, नींद नहीं आना, बैचेनी, चिड़चिड़ापन जैसे अधिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसी समस्या को लेकर बच्चे मेडिकल कॉलेज के मनकक्ष में पहुंच रहे हैं। उन्हें लगता है कि परीक्षा में फेल हो जाएंगे। उनकी कुछ याद नहीं है। ऐेसे विचार अब बच्चों को डरा रहे हैं।

केस नंबर एक
बिजनौर निवासी 16 वर्षीय छात्रा 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही है। उसके लगातार सिरदर्द, रोने की इच्छा, चिड़चिड़ापन और मैं फेल हो जाऊंगी जैसे नकारात्मक विचारों से परेशान हैै। घर में पढ़ाई को लेकर तुलना और दबाव उसकी मानसिक स्थिति को और खराब कर रहा है। परिजन उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
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केस नंबर दो
बिजनौर निवासी 17 वर्षीय छात्र 12वीं के साथ ही नीट की तैयारी भी कर रहा है। पिछले दो-तीन महीनों से नींद न आने, दिल की धड़कन तेज होने और पढ़ाई करते समय घबराहट की शिकायत लेकर ओपीडी पहुंचा। परीक्षा नजदीक आते ही उसके डर और बेचैनी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

केस नंबर तीन
बिजनौर निवासी 18 वर्षीय युवक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। पहले दो बार प्रतियोगी परीक्षा में असफल हो चुका है। इसकी वजह से अत्यधिक निराशा, आत्मविश्वास की कमी और सामाजिक दूरी की शिकायत लेकर ओपीडी पहुंचा। उसे यह लगने लगा कि वह परिवार और समाज पर बोझ है।

किशोरों में दिख रहे सामान्य लक्षण
-नींद न आना या बार-बार नींद टूटना
-घबराहट, बेचैनी, हाथ-पैर कांपना
-चिड़चिड़ापन, अत्यधिक गुस्सा या आक्रामक व्यवहार
-सिरदर्द, पेट दर्द, लगातार थकान
-पढ़ाई में मन न लगना, एकाग्रता में कमी
-नकारात्मक सोच, आत्मविश्वास में गिरावट
-धूम्रपान, तंबाकू या अन्य नशे की ओर झुकाव
-मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग

ऐसे करें बचाव
-बच्चों से अपेक्षाएं सीमित रखें
-खुला और शांत संवाद बनाए रखें
-संतुलित दिनचर्या बनाएं
-बच्चों को नशे से दूर रखने पर ध्यान दें
-असफलता को कलंक न बनाएं
-अधिक परेशानी होने पर मानसिक रोग विशेषज्ञ से समय पर संपर्क करें

वर्जन::
कुछ बच्चों ने मोबाइल का गलत इस्तेमाल किया। इस वजह से परीक्षा नजदीक आते ही तनाव बढ़ गया है। वहीं, कई मामलों में परिवार अनजाने में बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाओं का दबाव डालते हैं। इससे भी बच्चे मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
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....डॉ. नितिन कुमार, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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