कितने हुए साक्षर, बता नहीं पा रही कंपनी
रजनीश त्यागी
बिजनौर। डिजिटल भारत ने जोर पकड़ा तो सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों को मोबाइल चलाने, डिजिटल पेमेंट करने की थी। ग्रामीणों को भी डिजिटल की धारा से जोड़ने के लिए भारत सरकार की ओर से पीएमजीदिशा योजना शुरू की गई, जिसमें ग्रामीणों को डिजिटल पेमेंट करना, मोबाइल चलाना, सरकार की योजनाओं की जानकारी मोबाइल से जुटाना आदि का प्रशिक्षण दिया जाना था। इसके लिए जिले में एक संस्था ने ग्रामीणों को डिजिटल लिटरेसी का प्रशिक्षण दिया। अब सत्यापन को जिला प्रशासन ने सूची मांगी तो संस्था ने किसी भी ग्रामीण का नाम बताने से ही इनकार कर दिया। कई बार नोटिस जारी होने के बावजूद संस्था ने नाम नहीं बताया तो इस बार कार्रवाई तक की चेतावनी दे दी गई है।
करीब तीन साल पहले प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान शुरू किया गया था। यह काम जिले में सीएससी ई गवर्नेंस द्वारा कराया गया। एक अनुमान के मुताबिक अब तक दो लाख से ज्यादा ग्रामीणों को डिजिटल लिटरेसी का प्रशिक्षण देने की बात कही जा रही है। इस प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को मोबाइल चलाने, योजनाओं की जानकारी जुटाने, इंटरनेट इस्तेमाल करने, डिटिजल पेमेंट करने जैसी बेसिक जानकारी के साथ-साथ अन्य जानकारी भी दी जानी थी। करीब यह प्रशिक्षण 40 घंटे का होना था। संस्था द्वारा काम सही कराया गया है या नहीं, इसके सत्यापन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित हुई थी। अब इस काम को तीन साल से ज्यादा हो गए, लेकिन आज तक संस्था की ओर से कमेटी के बार-बार कहने पर भी लाभार्थियों की सूची नहीं सौंपी गई। ऐसे में प्रशासन की ओर से इस पर कई सवाल खड़े कर दिए गए और नोटिस तक जारी हुए, लेकिन इसके बावजूद नियमों का हवाला देते हुए संस्था ने कोई भी नाम या डाटा देने इनकार कर दिया। (संवाद)
जानकारी कर बताया जाएगा
कोई भी योजना हो, हर काम का सत्यापन होता है। इस मामले में जानकारी की जा रही है।
उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर
सूची मांगी गई, नहीं दी तो होगी कार्रवाई: सीडीओ
जिले में डिजिटल साक्षरता के लिए प्रशिक्षण देने वाली संस्था के जिला स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों से लाभार्थियों की सूची मांगी गई है। नोटिस जारी किया गया है, यदि सूची नहीं दी जाती तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। संस्था से सूची लेकर उसका सत्यापन कराया जाएगा।
केपी सिह, सीडीओ, बिजनौर
केंद्र को भेज दी गई सूची
सीएसी संस्था के जिला मैनेजर नसीम अहमद ने बताया कि हमने सूची केंद्र को भेज दी है। हमारे पास जो डाटा है, वह आधार नंबर के साथ है, इसलिए वह किसी को नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से हमसे नाम, एड्रेस, मोबाइल नंबर मांगे गए थे, इसलिए यह सूची नहीं दी जा सकी।