होरी सिंह ने नंगे पैर रहने और घर न जाने का लिया था संकल्प
बिजनौर। सरदार भगत सिंह ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा परिवर्तित कर दी थी। उनके बलिदान के बाद पूरे देश के युवा व्यथित हो गए थे। बिजनौर के होरी सिंह ने तो उनकी शहादत के बाद आजादी मिलने तक जूते चप्पल न पहनने तथा घर न आने का संकल्प लिया था। आज पूरा देश सरदार भगत सिंह की जयंती मना रहा है।
सरदार भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था। 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों द्वारा उन्हें फांसी दे दी गई थी। बिजनौर इतिहास के जानकर फीना निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित कराई गई स्मारिका में पूरे एक पेज पर होरी सिंह के बारे में लिखा गया था। उसमें जिक्र है कि धामपुर क्षेत्र के ग्राम सरकड़ा चकराजमल में जन्में होरी सिंह ने भगत सिंह की शहादत के बाद दूसरे दिन धामपुर में हुई एक श्रद्धांजलि सभा में यह प्रण किया था कि जब तक देश आजाद नहीं हो जाता, तब तक वह न तो जूते पहनेंगे न ही घर जाएंगे और न ही चारपाई पर सोएंगे। होरी सिंह को अंग्रेजों ने चार बार जेल भेजा। वह 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान एक वर्ष जेल में रहे। सन 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में छह माह की कैद में जेल भेजे गए। 1940 में एक वर्ष के लिए और सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी एक वर्ष के लिए जेल में रहे। उस समय होरी सिंह कांग्रेस के जिला मंत्री भी थे। आजादी के बाद उन्होंने जूते पहने और घर में प्रवेश किया। देश की आजादी के बाद होरी सिंह जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे।
आसफ अली ने की थी मुकदमे में कागजी कार्यवाही
बिजनौर। सरदार भगत सिंह ने अपने मुकदमे की पैरवी खुद की, लेकिन पैरवी में होने वाली कागजी कार्यवाही के लिए एक वकील की आवश्यकता थी। ऐसे समय में बिजनौर के स्योहारा में जन्मे आसफ अली ने सरदार भगत सिंह के मुकदमे के लिए कानूनी कागजात तैयार करके दिए थे। भगत सिंह के जीवन पर पुस्तक लिखने वाले चमन सिंह ने भी अपनी पुस्तक में जिक्र है।