बिजनौर। अक्सर देखने में आता है कि लोगों को उठते-बैठते या करवट लेते समय चक्कर आता है। यह कोई आम लक्षण नहीं है, बल्कि वर्टिगो एवं बैलेंसिंग डिसऑर्डर हैं। जी हां, युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ईयरफोन के अधिक प्रयोग से कान में संक्रमण होने से कान में घंटी बज रही है। मेडिकल कॉलेज में इस समस्या के रोजाना चार मरीज तक पहुंच रहे हैं।
वर्टिगो एवं बैलेंसिंग डिसऑर्डर (बीपीपीवी) कोई आम समस्या नहीं है। चक्कर आने पर लोग फिजीशियन के पास दवाई लेने जाते हैं लेकिन यह समस्या किसी और नहीं बल्कि बीपीपीवी की वजह से होती है। यह आंतरिक कान की बीमारी है। ईएनटी विभाग की डॉ. शालिनी ने बताया कि कान के आंतरिक के सूजन होने से चक्कर आने और गिरने जैसा महसूस होता है। सामान्य तौर पर यह बुजुर्गों में होने वाली बीमारी है, मगर युवा ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही ज्यादा शोर वाली जगह पर काम करने से भी कान में संक्रमण हो रहा है। यहीं वजह से कम उम्र में ही लोगों की सुनने की क्षमता कम हो रही है। इसके अलावा शुगर, दिमाग की वजह से भी यह डिसऑर्डर बढ़ रहा है।
ये हैं वर्टिगो के लक्षण
-चक्कर आना, उल्टी आना
-कानों की सुनने की क्षमता कम होना
-चलने में शरीर का असंतुलन होना
-कान में घंटी बजने की आवाज आना
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वर्टिगो एवं बैलेंसिंग डिसऑर्डर जेनेटिक, ईयरफोन के इस्तेमाल से होता है। करवट बदलने पर चक्कर आने की समस्या होती है। इसका इलाज संभव है। मरीजों को दवाई देने के साथ ही कुछ व्यायाम कराए जाते हैं। कुछ दिनों में मरीज स्वस्थ हो जाते हैं।
-डॉ. मोहिनी त्यागी, ईएनटी विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर