महात्मा गांधी के कहने पर हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने यह चैलेंज स्वीकार किया और 1937 में बिजनौर में उपचुनाव हुआ, जिसकी धूम पूरे एशिया सहित इंग्लैंड तक जा पहुंची थी। कायदे आजम कहे जाने वाले जिन्ना की नाक का सवाल बने चुनाव में मुस्लिम लीग की जीत के लिए खुद मोहम्मद अली जिन्ना ने बिजनौर में डेरा डाल दिया था। कांग्रेस की ओर से खान अब्दुल गफ्फार खान उर्फ सीमांत गांधी बिजनौर आए थे। इस चुनाव में हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने जनपद के बड़े वकील अब्दुल शमी को हराकर कांग्रेस का झंडा बुलंद किया था।
1964 में बनाए गए पंजाब के गवर्नर
1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़े होने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें कई बार गिरफ्तार कर जेल भेजा। जेल में उन्होंने एक शेर कहा ‘गुलामी को मिटाने को यहां से लेकर निकलूंगा वतन की अपने आजादी’। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके पुत्र अजीजुर्रहमान जो उस समय मात्र 15 वर्ष के थे। हाफिज मोहम्मद इब्राहिम से महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं की नजदीकी रहे। देश की आजादी के बाद वह केंद्र सरकार में मंत्री रहे। 1956 में हाफिज इब्राहिम ने देश के मुस्लिम सांसदों और विधायकों का एक अधिवेशन लखनऊ में कराया था, जिसमें पाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर अधिकार जताने का विरोध करते हुए कहा था कि कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेगा। 1964 में उन्हें पंजाब का गवर्नर नियुक्त किया गया 24 जनवरी 1968 की को लंबी बीमारी के बाद उनका देहांत हो गया।