हाफिज इब्राहिम (सिंधु जल संधि की खबर के साथ)
कोतवाली देहात (बिजनौर)। भारत-पाकिस्तान के तल्ख होते संबंधों के बीच सिंधु जल संधि चर्चा में है। भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया है। इस संधि के लागू होने के समय जनपद के हाफिज इब्राहिम केंद्रीय सिंचाई एवं ऊर्जा मंत्री थे। उन्होंने ही सिंधु जल संधि से संबंधित ज्यादातर जानकारी राज्यसभा में दी थी। संसद की कार्यवाही में यह सब दर्ज है।
इस जल संधि के अंतर्गत भारत द्वारा रावी, सतलुज, व्यास नदियों का पानी भारत को तथा चिनाब, झेलम और सिंधु का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को देने की बात तय की गई थी। संधि के समय देश के सिंचाई और ऊर्जा मंत्री रहे हाफिज मोहम्मद इब्राहिम का जन्म नगीना में हुआ था। आजादी मिलने के बाद 1958 से 1962 तक राज्यसभा सदस्य रहे। इस अवधि में ये नेहरू कैबिनेट में सिंचाई और ऊर्जा मंत्री थे। इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के संबंध में समझौता हुआ था। सिंचाई मंत्री होने के नाते हाफिज इब्राहिम ने इसमें भाग लिया था तथा समय-समय पर सदन में इससे जुड़ी कार्यवाही को रखा था।
सदन की कार्यवाही अभिलेखों में दर्ज
ग्राम फीना निवासी इतिहासकार इंजीनियर हेमंत कुमार ने अपनी पुस्तक जनपद बिजनौर का परिचय में इसका उल्लेख किया है । कार्यवाही अभिलेखों के अनुसार छह अप्रैल 1959 को हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने सदन को अवगत कराया था कि शीघ्र ही वे भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु बेसिन के जल बंटवारे को लेकर समझौते का जो ड्राफ्ट विचाराधीन था उसको सदन के सामने रखेंगे। इस क्रम में उन्होंने अगली कार्यवाही में सदन को बताया था कि वाशिंगटन में दोनों सरकारों ने 17 अप्रैल 1959 को इसे स्वीकृति दी थी। उन्होंने इस समझौते की प्रति सदन के सामने प्रस्तुत की थी।
पाकिस्तान के लिए सिंचाई का मुख्य स्रोत सिंधु जल
पाकिस्तान के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत सिंधु जलसंधि से मिलने वाला नदियों का पानी ही है। संधि रद्द होने के बाद पाकिस्तान पर भारी प्रभाव पड़ेगा। संधि कराची में हुई थी। 17 सितंबर 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अयूब खान ने संधि पर हस्ताक्षर किए थे ।