कादराबाद। शुक्रवार को गांव जामुनवाला में महिला क्रांति देवी की मौत के बाद विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए घटनास्थल के आसपास तीन पिंजरे लगाए हैं। जिसमें एक घटनास्थल पर दूसरा मुरली वाला गेट के समीप व एक पत्थर वाला हिदायतपुर में लगा हुआ है। मृतका का मध्यमवर्गीय परिवार है। मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं। उसके घर में दरवाजा तक नहीं है। दरवाजा ना होने का लाभ उठाते हुए दो दिन पूर्व भी गुलदार घर में घुस गया था लेकिन कमरे का दरवाजा ना खोले जाने पर कुछ देर बाद वहां से जंगल में चला गया था।
नगीना रेंजर प्रदीप शर्मा ने वनकर्मियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण कर जंगल में गश्त करनी शुरू कर दी है। बताया कि घटनास्थल के पास पिंजरा लगा दिया गया है। ड्रोन उड़ाने वाली एक्सपर्ट टीम को बुलाकर ड्रोन की मदद से गुलदार की मौजूदगी को जानने का प्रयास किया गया लेकिन अंधेरा होने से अभियान रोक दिया गया। राजस्व विभाग की टीम ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर जानकारी हासिल की।
परिवार की माली हालत अच्छी नहीं : क्रांति देवी की बेटी सोनम ने बताया ने रोते हुए बताया कि दो दिन पूर्व घर में दरवाजा न होने का फायदा उठाते हुए गुलदार घर में घुसा और दरवाजे कमरे के दरवाजे खोलने का प्रयास किया लेकिन मां दरवाजा खोल देती तो पहले ही मर जाती। घर में बड़ा परिवार है, जो कर्जे में है। घर का शौचालय तक सरकारी योजना से बना है।
सागर कुमार का कहना है कि बार-बार कहने के बाद भी वन विभाग लापरवाही बरत रहा है। यदि गुलदार के हमले नहीं रुकते हैं लोग खेतों से दूरी बना लेंगे। वन विभाग द्वारा गुलदार से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।
गांववासी लीलावती का कहना है कि क्रांति देवी ने दो लाख बेटी के विवाह में उनसे उधार लिया था। जो आज भी बाकी है परिवार मजदूरी कर पालन-पोषण कर रहा था। सरकार से मुआवजा मिले तो राहत होगी।
गांववासी रीता का कहना है कि पुरुषों सहित महिलाओं को भी फसल की देखभाल अथवा मजदूरी के लिए खेतों पर जाना पड़ता है। जानवर यदि जानलेवा हमला करें तो उन्हें भी अपने बचाव के लिए छूट मिलनी चाहिए। वन कर्मी द्वारा उल्टा ग्रामीणों पर ही मुकदमे लिखवाते हैं शासन द्वारा ग्रामीणों की रक्षा के लिए कोई कदम उठाना चाहिए।
सुमंत्रा का कहना है कि क्रांति की मौत से परिवार टूट गया है। सरकार को परिवार की जरूरत समझ उनकी मांग जल्द पूरी करनी चाहिए। जानवरों के मारने पर तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। लोगों के बचाव में जंगली जानवर की मौत पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।