बिजनौर। जिले में गुलदार का आतंक सिर्फ तीन साल के अंदर 22 से बढ़कर 190 गांवों तक फैल गया है। यह आंकड़े वन विभाग के हैं। वन विभाग ने गुलदारों के आतंक वाले इन गांवों को अति संवेदनशील गांवों में शामिल कर लिया है। तीन साल पहले तक मात्र 22 गांव ऐसे थे, जो रिजर्व फॉरेस्ट के नजदीक थे और यहां पर बाघ और गुलदार का खतरा था।
पांच साल पहले तक रिजर्व फॉरेस्ट में रहने वाला गुलदार जिले में आबादी के बीच गन्ने के खेतों में घूम रहा है। विभाग चाहे जो दावे करे, हमलों के आंकड़े इसकी मौजूदगी की गवाही दे रहे हैं। पिछले तीन साल में 36 इंसानों को गुलदार मार चुका है, वहीं सौ से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इनके पकड़े जाने के आंकड़े देखें तो तीन साल में 100 से ज्यादा गुलदार वन विभाग पकड़ चुका है।
रोजाना जिले में 10 से 15 जगहों पर गुलदार की मौजूदगी होने, जानवरों पर हमले होने की सूचनाएं भी आ रही है। ऐसे में वन विभाग ने गुलदार की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद गांवों को चिह्नित करना शुरू किया। 2024 तक संवेदनशील गांवों की संख्या मात्र 87 तक ही थी, लेकिन अब इन संवेदनशील गांवों की संख्या 190 पहुंच चुकी है। इनमें सबसे साल में ही ऐसे गांवों की संख्या 87 तक पहुंच गई है। इनमें सबसे ज्यादा जलीलपुर ब्लॉक के 48 गांव हैं। इसके बाद नूरपुर के 41 और अफजलगढ़ ब्लॉक के 40 गांव हैं।
चार साल पहले मात्र तीन पिंजरे थे, अब 200 : गुलदार की संख्या इस कदर बढ़ी की उन्हें पकड़ने के लिए वन विभाग ने पिंजरों की संख्या भी बढ़ाई है। चार साल पहले तक जिले में मात्र वन विभाग के पास तीन ही पिंजरे थे, क्योंकि गुलदार कभी कभी रिजर्व फॉरेस्ट से बाहर आता था। अब गुलदार गन्ने के खेतों में घूम रहा है तो उन्हें पकड़ने के लिए 200 पिंजरे बनवाए गए हैं, जिन्हें अलग-अलग जगहों पर लगाया गया है।