जनपद की पहली महिला प्रधान बनीं थीं गोमती देवी
बरूकी (बिजनौर)। केंद्र सरकार की ओर से ग्राम पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई है, लेकिन जिले में महिलाएं ग्राम पंचायत की राजनीति में छह दशक पहले से सक्रिय रही हैं। गांव तिसोतरा निवासी गोमती देवी को जनपद की पहली महिला ग्राम प्रधान बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। उनके साथ नौ महिलाएं ग्राम पंचायत सदस्य भी चुनी गई थीं।
विकास क्षेत्र नजीबाबाद की ग्राम पंचायत तिसोतरा की निवासी गोमती देवी 1960 में जनपद की पहली महिला ग्राम प्रधान बनी थीं। गोमती देवी के पौत्र डॉ. राजकुमार गुप्ता बताते हैं कि 1960 में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में उनकी दादी गोमती देवी को ग्राम प्रधान चुना गया था। उस समय आज की तरह बैलेट पेपर पर मुहर लगाकर चुनाव नहीं होते थे, बल्कि उस समय चौपाल पर लोग एकत्र होते थे तथा ग्राम प्रधान के पक्ष में हाथ उठाते थे। उस समय पर पर्दा प्रथा जोरों पर थी और एक महिला का ग्राम प्रधान बनना बेहद कठिन था। लेकिन उनके दादा बंशीधर गुप्ता ने ग्राम प्रधान के चुनाव में उनकी दादी को खड़ा किया और वह चुनाव में विजयी रहीं।
गोमती देवी के साथ गांव की नौ महिलाएं ग्राम पंचायत सदस्य चुनी गई थीं, जो उस समय पूरे प्रदेश में एक रिकॉर्ड था। 1963 में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंदिरा गांधी नजीबाबाद आई थीं, तब गोमती देवी ने उनके साथ मंच साझा करते हुए जनपद की महिलाओं का पक्ष रखा था। उन्होंने 12 साल तक ग्राम प्रधान रहने के बाद स्वेच्छा से पद छोड़ दिया था। डॉ. राजकुमार बताते हैं कि उनकी दादी गोमती देवी में जनपद की महिलाओं के लिए ग्राम पंचायत चुनाव में लड़ने का मार्ग प्रशस्त किया था। इसके बाद कई गांव में महिला ग्राम प्रधान चुनी गईं। गोमती देवी ने गांव के विकास के लिए काफी कार्य किए थे, साथ ही ग्रामीणों की समस्याओं से वह अधिकारियों को भी अवगत कराती थीं।
गोमती देवी की मृत्यु 23 अगस्त 1997 को हुई। डॉ. राजकुमार गुप्ता द्वारा गांव में ग्रामीण बाल सदन इंटर कॉलेज की स्थापना की गई। विद्यालय में गोमती देवी की प्रतिमा भी लगी है। वरिष्ठ समाजसेवी रीता भुइयार बताती हैं कि आजकल ग्राम प्रधान के पति तथा प्रधान के पुत्र जैसे नए संबोधन सृजित हो गए हैं, जबकि सरकार द्वारा ग्राम पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है। प्रधान पति तथा प्रधान पुत्र जैसे संबोधन औचित्यहीन हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए ऐसे संबोधन से बचना चाहिए। जो लोग महिला को प्रधान चुनते हैं, महिला प्रधान को उनके विषय में निर्णय लेने का भी अधिकार होना चाहिए।