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चीन को चोट, स्वदेशी उत्पादों पर जोर

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बिजनौर में दक्षनगर में गणेश चतुर्थी के लिए गणेश की मूर्तियां बनाते कमल प्रजापति। - फोटो : BIJNOR
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चीन को चोट, स्वदेशी उत्पादों पर जोर
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बिजनौर। सीमा पर चीन से तनातनी के बीच इस साल गणेश चतुर्थी पर चीन निर्मित भगवान गणेश की मूर्तियों पर पूरी तरह प्रतिबंध है। चीन को झटका लगने से इस बार स्थानीय मूर्तिकार मूर्ति उत्पादन को लेकर काफी उत्साहित हैं। जिले में मिट्टी से बनी ईको फ्रेंडली गणेश मूर्तियों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा है। मिट्टी की बनी ये मूर्तियां पानी में विसर्जित करने पर उसमें घुल जाएंगी।
22 अगस्त को देश भर में गणेश चतुर्थी का त्योहार धूमधाम से मनाने की तैयारियां चल रही हैं। गणेश चतुर्थी पर हर साल चीन निर्मित प्लास्टिक और प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनी मूर्तियों की भारी मांग होती थे। लेकिन इस बार भारत-चीन सीमा पर तनाव के चलते चीन से मूर्तियों के आयात पर प्रतिबंध है। इससे स्थानीय मूर्तिकारों में भारी उत्साह है। बिजनौर के दक्ष नगर में महेंद्र पाल सिंह प्रजापति और उनका परिवार सालों से मूर्ति निर्माण का कार्य करता आ रहा है। महेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण कार्य कर रहा है। उनके पिता गवर्मेंट कॉलेज में कुणाल कला के अध्यापक थे। वह मिट्टी से बर्तन बनाना और उन्हें पकाना सिखाते थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने घर पर ही मूर्ति बनाने का काम शुरू किया। जो आज तक चला आ रहा है।
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उन्होंने बताया कि वह नगर पालिका में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी और दो बेटे यह कार्य करते हैं। पहले उनके द्वारा प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बनाई जाती थी। इन मूर्तियों से नदी का जल प्रदूषित होता है। इसलिए अब उन्होंने मिट्टी की ईको फ्रेंडली मूर्तियां बनानी शुरू कर दी हैं। मिट्टी की बनी मूर्तियों को नदी में विसर्जित करने पर जल प्रदूषित नहीं होता है।
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उनका बेटा कमल प्रजापति बताता है के उनके यहां छोटी से बड़ी हर प्रकार की मूर्ति बनाई जाती हैं। पचास रुपये से लेकर पांच हजार रुपये कीमत की मूर्तियां उनके पास बिक्री के लिए हैं। आसपास के कई जिलों में उनके द्वार मूर्तियां सप्लाई की जाती हैं। लोगों के चीनी मूर्तियों के विरोध को देखते हुए उनका परिवार काफी उत्साहित है। उनके यहां बड़े पैमाने पर मूर्ति निर्माण का कार्य चल रहा है।
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