बिजनौर। जानलेवा हमले में फरार चल रहे सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन एवं उनके साथी रफी सैफी सोमवार को कोर्ट में पेश हुए। अपर सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट नंबर एक शांतनु त्यागी ने उनकी जमानत याचिका निरस्त करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन एवं रफी सैफी के विरुद्ध कोर्ट कई बार गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुकी थी परंतु यह न्यायालय में पेश नहीं हो रहे थे।
थाना कोतवाली शहर के ग्राम रसीदपुर गढ़ी निवासी छतर सिंह ने न्यायालय में वाद दाखिल किया था। जिसमें कहा कि 29 सितंबर 2020 को वह समय करीब 3:45 बजे शाम अपने साथी लवी के साथ स्कूटी से अपने रिश्तेदार के ग्राम गंगौड़ा जा रहे थे। जैसे ही रेलवे फाटक पार किया तो पीछे से एक गाड़ी आई, जिसमें सवार सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन, कपिल गुर्जर, रफी सैफी, मनोज ने अपने अन्य दो अन्य साथियों के साथ उसकी स्कूटी रोक ली। इन सभी ने उसे जान से मारने की नीयत से मारपीट की। जिससे उसके चोट आई, गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कोर्ट ने इस मामले में 22 अगस्त 2022 को सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन, रफी सैफी, मनोज, कपिल गुर्जर सहित 6 को विचरण के लिए तलब किया था। कोर्ट के बार-बार बुलाए जाने के बावजूद राशिद हुसैन, रफी सैफी, मनोज आदि कोर्ट में पेश नहीं हुए। जिस पर कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। आज इस मामले में राशिद हुसैन व रफी सैफी कोर्ट में पेश हुए तथा अपनी जमानत याचिका पेश की।
कोर्ट ने इस मामले में उनके अपराध को गंभीर मानते हुए उनकी जमानत याचिका निरस्त कर दी और उन्हें जेल भेज दिया। बता दें कि जेल जाने वाले रफी सैफी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नसरीन सैफी के पति हैं। उधर, इसी मामले में नगीना से विधायक मनोज पारस के गिरफ्तारी वारंट भी जारी हैं।