- पिता ने साहूकार को 24 लाख में गिरवी रखा तीन मंजिला मकान
- अन्य लोगों का भी ब्याज पर लिया था कर्ज, अक्सर तकादा करते थे देनदार
- बैंक के गबन के 40 लाख उतारने के लिए मकान रखा था गिरवी
संवाद न्यूज एजेंसी
शेरकोट (बिजनौर)। कर्ज के बोझ में दबे व्यक्ति के बेटे आदित्य पुंडीर (15) ने फंदे पर लटक कर जान दे दी। इकलौते बेटे के आत्महत्या किए जाने से पूरा परिवार गम में डूबा है। दरअसल आदित्य के परिवार पर 40 लाख से ज्यादा का कर्ज है। अक्सर कर्ज चुकाने के लिए लोग तकादा करते थे, जिससे आदित्य भी आहत रहता था। उसने साहूकार के यहां मकान भी 24 लाख में गिरवी रखा हुआ है। अब यह परिवार अपने ही तीन मंजिला मकान में किराएदार बनकर रह गया है।
शनिवार की सुबह मां निर्मल बेटे आदित्य को जगाने छत पर पहुंची तो इकलौते बेटे को के फंदे पर झूलता देख बेसुध हो गई। नगर के मोहल्ला वीरथला निवासी संजय कुमार हरिद्वार में एक प्राइवेट फैक्टरी में काम करता है। घर पर संजय की पत्नी निर्मल बेटे आदित्य के साथ रहती है। आदित्य धामपुर के एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र था। मां निर्मल ने बताया कि शुक्रवार की रात करीब 11 बजे तक आदित्य उनके साथ बैठा था। कुछ देर बाद आदित्य सोने के लिए घर की तीसरी मंजिल पर बने में कमरे में चला गया। शनिवार की सुबह उसका शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
- जमाकर्ताओं के पैसों में हेराफेरी के कारण रद्द कर दी गई थी मिनी शाखा
मूल रूप से ज्वालापुर हरिद्वार निवासी संजय कुमार के पिता नगर की बैंक आफ बड़ौदा शाखा में कैशियर के पद पर कार्यरत थे। पिता की नौकरी के कारण संजय का परिवार शेरकोट में ही रहने लगा। पिता की मौत के बाद संजय को बैंक आफ बड़ौदा की मिनी शाखा संचालित करने की अनुमति मिल गई। मिनी शाखा संचालन के दौरान संजय पर जमाकर्ताओं के पैसों में हेराफेरी का आरोप लगा। जिसके चलते बैंक ने उन्हें नोटिस जारी कर मिनी शाखा संचालन की अनुमति रद्द कर दी। इस दौरान कुछ जमाकर्ताओं ने संजय के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी करने का प्रयास किया, लेकिन मामला शांत करा दिया गया।
मिनी शाखा का संचालन छूटने के बाद संजय हरिद्वार की प्राइवेट कंपनी में काम करने चला गया। इसी बीच जमाकर्ताओं की रकम चुकाने के लिए संजय पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता रहा। सूत्रों का कहना है कि पिता पर कर्ज के बोझ और सामाजिक तानों के कारण आदित्य पर मानसिक दबाव था। वह अवसाद में रहता था।
- अपने ही घर में किराएदार की तरह रहने को मजबूर हुआ परिवार
बताया गया है कि जमाकर्ताओं का कर्ज उतारने के लिए संजय ने बैंक से जुड़े कुछ साहूकारों से भी लाखों रुपये ब्याज पर ले रखे थे। कर्ज की रकम न चुकाने की स्थिति में उसने एक साहूकार के यहां अपना मकान गिरवी रख दिया। पांच साल के भीतर पैसे न चुकाने की स्थिति में संजय को अपने ही घर से हाथ धोना पड़ता। फिलहाल संजय का परिवार अपने ही घर में किराएदार की तरह रहने को मजबूर था। मां निर्मला का कहना है कि पिछले करीब एक साल से आदित्य बहुत गुमसुम रहता था।
- मोबाइल पर मैसेज आने के बाद छत पर सोने के लिए चला गया था आदित्य
मृतक आदित्य की मां निर्मला का कहना है कि शुक्रवार को आदित्य ने दिन भर कुछ नहीं खाया। शाम को जब आदित्य से खाने के लिए पूछा गया तो उसने मना कर दिया। देर रात तक वह अपनी मां के साथ कमरे में ही बैठा था। इसी बीच मोबाइल पर किसी का मैसेज आने पर वह सोने की बात कह कर छत पर चला गया और सुबह उसका शव फंदे से लटका मिला। मां का कहना है कि आदित्य के मोबाइल से भी जानकारी मिल सकती है।
- शिक्षक बोले पढ़ने में होनहार था आदित्य
15 वर्षीय आदित्य पुंडीर धामपुर के शिखर स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र था। उसकी बड़ी बहन सानिया भी इसी स्कूल में कक्षा 11वीं में पढ़ती है। प्रधानाचार्य भारती यादव और शिक्षक आरएन सिंह का कहना है कि आदित्य पढ़ने में होनहार था। उसकी गिनती स्कूल के मेधावी बच्चों में थी। दोनों बच्चों की फीस भी समय से स्कूल में जमा होती थी। आदित्य की मौत की खबर से स्कूल परिवार स्तब्ध है।
- मां के साथ काम में हाथ बंटाता था आदित्य
पड़ोसी बताते हैं कि आदित्य छोटी सी उम्र में ही परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझता था। पिता हरिद्वार में नौकरी करते हैं। मां निर्मल घरेलू कार्यों के साथ घर पर ही ब्रश आदि बनाने का काम भी करती है। आदित्य ज्यादातर घर पर ही समय बिताता था। इस दौरान आदित्य भी घरेलू कार्यों में मां का हाथ बंटाता था।
- आदित्य के मोबाइल से मिलेगी मदद : सीओ
पुलिस क्षेत्राधिकारी धामपुर अभय कुमार पांडे का कहना है कि पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में किशोर पर कर्ज के दबाव का मामला सामने नहीं आया है। पुलिस ने आदित्य के मोबाइल को कब्जे में ले लिया। मोबाइल से घटना को समझने में मदद मिलेगी। पुलिस हर एंगल पर गहनता से जांच पड़ताल कर रही है।
- गरीबों को मार रहा ब्याज पर ब्याज
सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार विश्वकर्मा का कहना है कि वर्तमान में ऐसे कई समूह चल रहे हैं। जो पहले कर्ज देते हैं और फिर किस्त और ब्याज वसूली के लिए इतना दबाव बना देते हैं कि उधार लेने वाला मानसिक रूप से परेशान हो जाता है। कर्ज लेने वाला गरीब ब्याज पर ब्याज चुकाने में मर रहा है। उन्होंने प्रशासन से लोगों से बेतहाशा ब्याज वसूली करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
किशोर की मौत के बाद विलाप करते परिजन स्रोत संवाद