फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपनी लेखनी से हिंदी को समृद्ध कर रही हैं डा. शशि प्रभा

विज्ञापन
डा.शशिप्रभा। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
अपनी लेखनी से हिंदी को समृद्ध कर रहीं हैं डा. शशि प्रभा
विज्ञापन

बिजनौर। वर्धमान कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डा. शशि प्रभा अपने लेखनी से हिंदी की समृद्धि के लिए कार्य कर रही हैं। उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं, साथ ही उन्होंने कई राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध पत्रों का वाचन भी किया है। डा. शशि प्रभा बताती हैं कि उनके पिता राम कुमार राठौर दिल्ली में हिंदी के शिक्षक थे। उनसे उन्हें हिंदी लेखन की प्रेरणा मिली। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने रूहेलखंड विश्वविद्यालय से हिंदी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। डा. शशि प्रभा के कई शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी एक पुस्तकऽ शिक्षा की समस्याएं और हिंदी कथा साहित्यऽ प्रकाशित हो चुकी हैं। डा. शशि प्रभा का कहना है कि हिंदी उनके रग-रग में बसी है। हिंदी में जो अभिव्यक्ति की क्षमता है वह किसी दूसरी भाषा में नहीं है। गत 27 वर्षों से आकाशवाणी से उनकी हिंदी वार्ताएं निरंतर प्रसारित होती रही हैं।
तमिलनाडु निवासी डीएफओ एम सेम्मारन बोलते हैं शुद्ध हिंदी
बिजनौर। हिंदी का प्रसार राज्यों की सीमाओं को तोड़ता हुआ पूरे देश में फैल चुका है। बिजनौर में तैनात जिला वन अधिकारी दक्षिण भारतीय होने के बावजूद शुद्ध हिंदी बोलते हैं तथा वह हिंदी साहित्य में भी रुचि रखते हैं।
विज्ञापन

तमिलनाडु के नागापटनम जिले के आयंकरनपुलम गांव के निवासी डा. एम सेम्मारन बिजनौर में जिला वन अधिकारी के पद पर तैनात हैं। वह बचपन से तमिल भाषी है। यूपी कैडर के अधिकारी डॉ. सेम्मारन की नौकरी हिंदी भाषी राज्य उत्तर प्रदेश में शुरू हुई । वह बताते हैं कि शुरू में उन्हें हिंदी बोलने और समझने में बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ा। उनका प्रशिक्षण बहराइच जनपद में हुआ। उन्हें पहली नियुक्ति एटा जनपद में मिली। इसके बाद उनका तबादला बिजनौर हो गया। यहां उन्होंने एक सेवानिवृत वन रेंजर से हिंदी सीखनी शुरू की। डॉ सेम्मारन बताते हैं कि शुरू में हिंदी कुछ कठिन लगी, लेकिन बाद में उन्हें बेहद आनंद आने लगा। अब वे काफी हद तक शुद्ध हिंदी बोलने लगे हैं। उनका कहना है कि हिंदी सारे देश को एकता के सूत्र में बांधती है। डॉ सेम्मारन बताते हैं कि विभाग में हिंदी में होने वाले पत्र व्यवहार की ड्राफ्टिंग वह स्वयं करते हैं। वह बच्चों की स्कूली किताबों में लिखी हिंदी की कविताओं और कहानियों के बेहद शौकीन हैं। वह हिंदी साहित्य को भी स्कूली किताबों में खूब पढ़ते हैं। वह कहते हैं कि हिंदी हमारे देश का गौरव है।
उर्दू के साथ हिंदी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे फाखिर अदीब
बिजनौर। फाखिर अदीब साहित्य के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है। पूरे देश से उन्हें कवि सम्मेलन और मुशायरों का संचालन करने के लिए बुलाया जाता है। वह अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी का प्रकाश पूरे देश में फैला रहे हैं। उन्हें देश के नामचीन कवियों के साथ मंच साझा करने का मौका मिला है।
विज्ञापन

बिजनौर के मोहल्ला काजीपाड़ा निवासी फाखिर अदीब के पिता सेना में अफसर थे। अदीब को उन्हें बचपन से ही कविताएं और गजलें लिखने का शौक था। जानदार लेखनी और शानदार आवाज के साथ-साथ बेहतरीन प्रस्तुतिकरण ने उन्हें देश का प्रमुख संचालनकर्ता बना दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के दर्जनों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में संचालन का दायित्व निभाया। उन्होंने गोपालदास नीरज, गुलजार, आनंद मोहन, कृष्ण बिहारी नूर, मुनव्वर राणा तथा वसीम बरेलवी जैसे विश्वविख्यात कवियों के साथ मंच साझा किए। वह गंगा जमुनी तहजीब के संवाहक रहे हैं। उनकी गजलों की प्रशंसा दिलीप कुमार, राज बब्बर, कादर खान तथा सुनील दत्त सरीखे सिने कलाकार भी कर चुके हैं। वह एनडीटीवी इंडिया के कार्यक्रम अर्ज किया है तथा लखनऊ, जयपुर दूरदर्शन के कार्यक्रमों और जी सलाम के कार्यक्रमों में भागीदारी करते रहे हैं। फाखिर अदीब का कहना है कि उन्होंने तमिलनाडु जैसे अहिंदी भाषी राज्य में भी काव्य पाठ कर हिंदी की अलख जगाई है। आज हिंदी पूरे देश में बोली और समझी जाती है। उनकी प्रसिद्ध कविता आसमान रोता है, यह जमी सिसकती है, अब भी जब कोई राधा अपने श्याम से बिछड़ती है, भोली भाली एक लड़की हाथ में लिए राखी, जगमगाते हाथों को हसरतों से तकती है।

डीएफओ सेम्मारन।- फोटो : BIJNOR

फाखिर अदीब- फोटो : BIJNOR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें