डिजिटल माध्यम से हिंदी को समृद्ध बना रहे डॉ. अरुणदेव
नजीबाबाद/बिजनौर। डिजिटल माध्यम से हिंदी को समृद्ध बनाने में वेब पत्रिका समालोचन ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। डॉ. अरुण देव ने समालोचन वेब पत्रिका के माध्यम से साहित्य, संस्कृति और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को आमजन को हिंदी भाषा में देकर साहित्य प्रेमियों को नई ऊर्जा प्रदान की है।
साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद के हिंदी विभाग में कार्यरत डॉ. अरुण देव ने एक दशक पूर्व वेब पत्रिका समालोचन का प्रकाशन शुरू किया था। पत्रिका प्रकाशन का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से हिंदी को आमजन की भाषा बनाने के साथ साहित्यिक, सांस्कृतिक और समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेखनी के माध्यम से आमजन तक पहुंचाना था। 16 फरवरी 1972 में कुशीनगर में जन्मे अरुण देव वर्ष 2004 से साहू जैन कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर हैं। साहित्य सृजन के साथ काव्य विधा में भी उनकी अभिरुचि है। कर्मस्थली नजीबाबाद बनाने के बाद डॉ. अरुण देव ने जहां हिंदी के अभिनव विकास के लिए विद्यार्थियों और समाज को प्रोत्साहित किया। वहीं, अपनी लेखनी के माध्यम से देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई।
काव्य सृजन में उन्हें राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार मिला। जबलपुर आर्ट फाउंडेशन ने हिंदी साहित्य सेवा के लिए अरुण देव को इत्यादि सम्मान से नवाजा। तीन कविता संग्रह और दो पत्रिकाओं का संपादन करने वाले अरुण देव हिंदी को समृद्ध बनाने के मिशन में अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने विश्व विख्यात चित्रकार सैय्यद हैदर रजा पर सीरिज प्रकाशित की। एक दशक पूर्व नजीबाबाद से डिजिटल माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए वेब पत्रिका समालोचन का प्रकाशन शुरू किया। 1800 से अधिक एकल अंक के साथ समालोचन पत्रिका भारतीय भाषाओं की सर्वश्रेष्ठ डिजिटल पत्रिका में अपना स्थान बना चुकी है।
मुंबई विवि के पाठ्यक्रम में शामिल है पुस्तक
मुंबई विश्वविद्यालय ने समालोचन को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। साहित्य सृजन के साथ समालोचक के रूप में पहचान रखने वाले डॉ. अरुण देव को साहित्य एकेडमी दिल्ली और भारत भवन भोपाल सहित कई साहित्यिक मंचों पर हिंदी व्याख्यान के लिए समय-समय पर आमंत्रित किया जा चुका है। उनका कहना है हिंदी ने आजादी के आंदोलन से लेकर आज तक समाज को राष्ट्रप्रेम, सामाजिक मुद्दों पर संघर्ष करने का हौसला देने और सर्वधर्म समभाव के क्षेत्र में अहम भूमिका अदा की है। देश को आजाद कराने में राष्ट्रभक्तों और देशवासियों की प्रेरणा का स्रोत बनकर हिंदी ने सेतु का काम किया है।