दहेज उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने वाली जैमिन।
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बिजनौर में ठोकर खाकर तो सभी संभलते हैं, लेकिन ऐसे बहुत कम होते हैं जो खुद भी संभलते और दूसरों को संभालते हैं। ऐसा ही एक नाम है जैमिन चौधरी, जो दहेज के लिए ससुराल का उत्पीड़न झेलकर न सिर्फ अपने बूते खड़ी हुई, बल्कि ऐसी दूसरी पीड़ित महिलाओं के लिए भी ढाल बनी हुई हैं। अनेक महिलाओं को दहेज के उत्पीड़न से निजात दिला चुकी जैमिन कहीं आपसी संवाद से तो कहीं कानूनी कार्रवाई से दहेज के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। इनके प्रयास से कई दंपतियों का फिर से मिलन हो चुका है।
किरतपुर कस्बे की रहने वाली जैमिन का निकाह करीब आठ साल पहले मोहल्ला कस्साबान के युवक से हुआ और खुशहाल वैवाहिक जीवन के सपने लेकर विदा हुई थी। लेकिन ससुराल की हकीकत इन सपनों को तोड़ने लगी। कुछ दिन बाद ही ससुरालवालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पांच लाख रुपये की मांग पूरी न करने पर शादी के पांच महीने बाद ही ससुराल से निकाल दी गई। रोती हुई घर पहुंची और कुछ दिनों बाद पति के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। पति ने तलाक दिए बिना ही दूसरा निकाह कर लिया। जैमिन ने आसपास देखा तो दहेज पीड़ित महिलाओं की भीड़ मिली तो उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाने की ठानी और महिलाओं को जागरूक करना शुरू किया। कई मामलों में मध्यस्थता की और दंपतियों को मिलवाया। जहां ससुरालवाले नहीं माने तो उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करवाई। पुलिस के डर से इन परिवारों ने भी दहेज को छोड़कर अपनी बहुओं को अपना लिया। आज जैमिन पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज बन गई हैं।
जैमिन के खिलाफ कई परिवारों ने आवाज भी उठाई। कई लोगों को महिलाओं के लिए चलाई जा रही उनकी मुहिम पसंद नहीं आई। उन्होंने विरोध किया, लेकिन जैमिन डटी रही।
हद तो तब हुई जब विरोध करने वाले भी अपने परिवार की बेटी का दहेज के लिए उत्पीड़न होने पर जैमिन के पास ही पहुंचे। जैमिन पर उनके ससुरालवाले कई बार हमले कर चुके हैं। एक बार तो चाकू से उनकी गर्दन तक रेत दी और केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया, लेकिन वह लगातार डटी हुई हैं।