... मुझे ना समझो बेचारी, मैं भारत की नारी हूं
बिजनौर। महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम के तहत वेबिनार का आयोजन किया गया। बेबिनार में महिला कवयित्री और महिला शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
बेबिनार में विचार रखते हुए नजीबाबाद की कवयित्री निशा अग्रवाल में कहा, शक्ति रूप धरा जब मैंने, मां दुर्गा कहलाती हूं ,दुष्टों का जब दलन किया, तब चंडी बन जाती हूं, कभी बहन हूं कभी हूं बेटी, और कभी महतारी हूं ,मुझे ना समझो बेचारी, मैं तो एक चिंगारी हूं, मैं भारत की नारी हूं, हां मैं भारत की नारी हूं।
स्योहारा की शायरा मेहनाज स्योहरवी ने कहा, फिजूल दिल को दुखाने से फायदा क्या है, इन आंसुओं को बहाने से फायदा क्या है, यह मशवरा है कि अपना मुकाम पैदा कर, हवा में तीर चलाने से फायदा क्या है।
बिजनौर की कवयित्री सुमन चौधरी ने पढ़ा, अब दुर्योधन और दुशासन महलों से बाहर भी चीर हरण करने लगे हैं, और कोई कृष्ण नहीं आता, उठो! अब तुम्हें स्वयं ही सबल होना होगा, आदि शक्ति बनकर महिषासुर का दलन करना होगा।
नजीबाबाद की कवयित्री मंजू जौहरी ने कहा, नारी को तुम कम मत आंको, ये है हिंदुस्तान की मूरत। पावन संस्कृतियों की धरोहर ये है आन और बान की मूरत। करती हूं करबद्ध निवेदन नारी का सम्मान करो तुम।
नजीबाबाद की कवयित्री मंजू वर्मा ने कहा, नारी की वेदना क्या जानो तुम, कितनी पीड़ा सहती है, फिर भी हर पल हंसती है, दो-दो घर की लाज रखे नारी से तुम जन्मे होये क्यों भूल गए तुम।
नगीना की कवयित्री शाकुंभरी देवी ने कहा, मुस्कुराकर दर्द भुलाकर रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी, हर पग को रोशन करने वाली वो शक्ति है एक नारी।