जिले को मिली 10 डोज वाली वैक्सीन
बिजनौर। जिले में अब एंटी कोविड वैक्सीन बर्बाद नहीं होगी। इसके लिए अब कोवैक्सीन की शीशी में 20 के बदले दस डोज वाली शीशी प्राप्त हुई हैं। इससे एक ओर टीके की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी, तो वहीं दूसरी तरफ शासन की मंशा के अनुरूप करीब-करीब हर जरूरतमंद व्यक्ति कोरोना के खतरे से मुक्त होकर प्रतिरक्षित हो पाएगा। शासन की गाइडलाइन के अनुसार वैक्सीन खुलने के लगभग चार घंटे बाद बॉयल खराब हो जाती है। जनपद में शुरुआत से लेकर अब तक करीब 836 डोज खराब हो चुकी हैं। हालांकि शासन ने दस प्रतिशत डोज निष्प्रयोज्य आरक्षित कर रखी हैं।
शासन ने कोरोना को हराने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। देश भर में 16 जनवरी से कोरोना योद्धाओं को टीका लगाने के बाद अब एक मार्च से आम जनता को प्रतिरक्षित करने की शुरुआत हो चुकी है। शुरुआत में केवल 45 से 60 साल तक के लोगों को प्रतिरक्षित किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी अशोक कुमार के अनुसार अभी हाल ही में करीब 35 हजार डोज प्राप्त हुई है। इनमें प्रत्येक बॉयल में दस डोज हैं। इससे पूर्व वाली वैक्सीन बॉयल में 20 डोज होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। एक मार्च को हुए टीकाकरण के दौरान पर्याप्त मरीज न पहुंचने के कारण डोज खराब होने की संभावना के चलते पुलकित मेमोरियल हॉस्पिटल में टीकाकरण नहीं हो पाया था। इसके अलावा शुरुआत से लेकर अब तक जनपद में करीब 836 डोज बर्बाद हुई हैं। इसका कारण ये है माना कि एक केंद्र पर केवल दो या चार लोग ही टीका लगाने पहुंचे और चार घंटे तक कोई भी व्यक्ति टीकाकरण कराने नहीं आया तो शेष डोज बेकार हो जाएंगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि अभी हाल ही में 20 के बदले दस डोज की शीशी प्राप्त हुई हैं। भविष्य में भी इसी प्रकार से वैक्सीन डोज मिलेंगी।