पूरी नहीं हुई बिजनौर-हस्तिनापुर रेल लाइन की मांग
बिजनौर। कोरोना काल के पहले बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकास कार्यों के लिए योजनाओं का पिटारा खोल दिया। इससे कुछ लोगों में हर्ष व्याप्त रहा तो कुछ में मायूसी दिखाई दी। इस बार बिजनौर-हस्तिनापुर रेलवे लाइन का जिलेवासियों का सपना अधूरा ही रह गया। तो वहीं जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में कोई राहत न देने से भी लोगों को मायूसी मिली।
सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक सतेंद्र दत्त शर्मा के अनुसार इस बार भी रेलवे के लिए कुछ खास नहीं मिला। इस बार भी बिजनौर-हस्तिनापुर रेलवे लाइन की आस अधूरी रहेगी। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद से आज तक द्रोपदी के श्राप के कारण हस्तिनापुर का कोई खास विकास नहीं हो पाया। पहली पंचवर्षीय योजना में चंडीगढ़ और हस्तिनापुर को चयनित किया गया था। वर्तमान में चंडीगढ़ तो कहीं से कहीं पहुंच गया, लेकिन हस्तिनापुर में कोई खास तरक्की नहीं हुई। चंडीगढ़ तो पंजाब और हरियाणा की राजधानी बन गया, लेकिन हस्तिनापुर केवल महाभारतकालीन ही रह गया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब आठ वर्षों से बिजनौर-हस्तिनापुर रेल लाइन का कार्य अधूरा पड़ा है। इसे विदुरकुटी से जोड़ने के लिए बिजनौर-हस्तिनापुर रेलवे लाइन का बनाया जाना अति आवश्यक है।
वर्धमान कॉलेज के पूर्व प्राचार्य जीआर गुप्ता के अनुसार बजट विकास की दृष्टि से अनुकूल है। यह बजट आधार भूत संरचना को गति प्रदान करने के साथ-साथ शिक्षा के विकास की भी प्राथमिकता वाला है। इसमें 100 नए सैनिक स्कूल, हायर एजुकेशन कमीशन का निर्माण, अनुसूचित जाति के चार करोड़ और विद्यार्थियों के 35 हजार करोड़ का बजट दिया है। सेवानिवृत्त अमीन राजपाल सिंह कहते हैं कि 75 साल से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर में छूट प्रदान कर सरकार ने उन्हें तोहफा दिया है। दवाइयों के दाम में भी राहत मिलनी चाहिए थी, क्योंकि सबसे अधिक जीवन रक्षक दवाओं की आवश्यकता वरिष्ठ नागरिकों को ही होती है।
रिटर्न नहीं भरेंगे तो कैसे रखेंगे हिसाब-किताब
विद्युत निगम में एसडीओ के पद से सेवानिवृत्त एसएम शर्मा ने बताया कि जब वरिष्ठ नागरिक इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरेंगे, तो हिसाब कैसे रखेंगे। उन्होंने बताया कि एरियर, महंगाई, भत्ता, ट्रेजरी आदि को तो फिर भी हिसाब देना ही होगा। इसका रिटर्न भरने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस उम्र में आकर आदमी शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है और आंखों में कमी आने लगती है। हर तरह के बड़े नेताओं पर आयकर लगाया जाना चाहिए। इसमें भी छोटे लोगों को परेशान किया जाता है।
डा.जीआर गुप्ता।- फोटो : BIJNOR