बिजनौर। नगर पालिका बिजनौर की चेयरपर्सन रूखसाना परवीन व उनके पति शमशाद अंसारी के विरुद्ध आयु छिपाकर चुनाव लड़ने के मामले में दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट ने निरस्त करने से इंकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने चेयरपर्सन व उनके पति को दो सप्ताह में कोर्ट में पेश होकर अपनी जमानत कराने को कहा है। इस समय अंतराल में पुलिस को उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई न करने के आदेश दिए है।
जिला बार अध्यक्ष एसके बबली ने नगर पालिकाध्यक्ष रुखसाना परवीन व उनके पति शमशाद अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि रुखसाना परवीन ने पालिका के चुनाव में नामांकन में खुद अनपढ़ बताते हुए अपनी उम्र 30 साल से अधिक बताई थी जबकि वे 30 साल से कम और वे पढ़ी लिखी महिला हैं। उन्होंने नेशनल स्कूल नगीना व दयानंद वैदिक कन्या इंटर कॉलेज नगीना से शिक्षा ग्रहण की है। कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार उनकी जन्मतिथि 23 फरवरी 1989 है। नामांकन के वक्त उनकी आयु 28 साल, आठ माह व 14 दिन थी। उन्होंने अपने पति से हमसाज होकर अपनी आयु व साक्षर होने की बात छिपाई। नामांकन पत्र पर गलत जानकारी दी। इस मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में चेयरपर्सन रुखसाना परवीन की ओर से कहा गया कि वे किसी स्कूल या मदरसे में नहीं पढ़ी हैं।
उनके खिलाफ राजनीतिक विद्वेष के कारण रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। क्योंकि रिपोर्ट करने वाले एसके बबली की पत्नी नीता अग्रवाल उनके खिलाफ चुनाव लड़ीं और हार गईं थी। इस मामले में एक मार्च को हाईकोर्ट ने दिए अपने निर्णय में कहा है कि चेयरपर्सन रुखसाना परवीन व उनके पति शमशाद अंसारी के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध होना पाया जाता है और विवेचना जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार है। हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने की प्रार्थना को ठुकराते हुए कहा है कि यदि चेयरपर्सन व उनके पति ने अपनी जमानत नहीं कराई है तो वे इस आदेश के दो सप्ताह के अंदर कोर्ट में पेश हों। दो सप्ताह के दौरान पुलिस उनकी गिरफ्तारी नहीं करेगी। कोर्ट में सरेंडर की यह अवधि 15 मार्च को पूरी होगी।