संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। यूं तो सरकार की ओर से मिलने वाले खाद्यान्न पर गरीबों का पहला हक है, मगर कार में चलने वाले लोग भी सस्ते गल्ले की चाह रखते हैं। दरअसल, राशन कार्ड निरस्त होने पर कार स्वामी भी पात्र बनने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
राशन कार्ड की पात्रता सूची से बाहर होने वाले करीब दस प्रतिशत लोग खुद को गरीब होने का हवाला देकर कार से आपूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने कर्ज पर कार खरीदी और इसके लिए आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया था।
शहरी इलाकों में 62 और गांव देहात में 79 फीसदी आबादी को खाद्य सुरक्षा गारंटी के तहत सरकार सस्ती दरों पर अनाज मुहैया करा रही है। इसके लिए 605584 राशन कार्ड बने हुए थे। कुल यूनिट 2696336 हैं। अंत्योदय के योजना के तहत भी 20608 परिवारों को मुफ्त अनाज वितरित होता है। एक यूनिट पर पांच किलो अनाज मिलता है।
साल 2011 की जनगणना के आधार पर राशन कार्ड बने हुए थे। अब आबादी बढ़ी तो तमाम अन्य गरीबों के राशन कार्ड बनाया जाना जरूरी हो गया था। इसके लिए सरकार की ओर से सत्यापन कराते हुए अमीरों को मुफ्त के राशन से बाहर कर दिया है।