कालागढ़(बिजनौर)। 20 अक्तूबर को कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वनों में वनकर्मी पर हमला कर मौत की नींद सुला देने वाला बाघ वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने गश्ती दलों को वनों में कैमरा ट्रैप लगाने के आदेश दिए है।
20 अक्तूबर की रात को कालागढ़ टाइगर रिजर्व की प्लेन रेंज में वनकर्मी राजेश नेगी को गश्त के दौरान बाघ ने हमला कर मौत की नींद सुला दिया था। बाघ के हमले के बाद से वन विभाग सहमा हुआ है। छह दिन बीतने के बाद भी वन विभाग तय नहीं कर पाया है कि यह कौन सा बाघ है। जबकि इसी क्षेत्र में पहले भी एक वनकर्मी को बाघ ने इसी तरह से हमला कर मौत के हवाले कर दिया था। वहीं, वन विभाग के फील्ड कर्मचारियों ने वन विभाग से इस बाघ को नरभक्षी घोषित करने की मांग भी उठाई है। इस बारे में कालागढ़ टाइगर रिजर्व के उप प्रभागीय वनाधिकारी एलआर नाग ने बताया कि मामला सुदूर जंगलों के बीच का है। चौखम तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। बाघ का पता लगाने के लिए सशस्त्र रायफल के साथ बड़े गश्ती दल को क्षेत्र में भेजा गया है। घटनास्थल पर छह कैमरा ट्रैप लगाए गए है। चार और लगाए जाने है। वन विभाग उच्चाधिकारियों से मिले आदेशों का पालन कर रहा है। दक्षिणी सीमा पर विशेष गश्ती दल तैनात किए गए है।