बिहार के विश्वविद्यालय से की डॉक्टरेट
बिहार के एक विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई। डॉक्टर सोती ने हिंदी में कविता, गजल, दोहे, छंद, मुक्तक की रचना की। वह मंचों पर काव्य पाठ करते रहे। बिजनौर में होने वाली काव्य संध्याओं में वह नियमित भाग लेते रहे। वर्तमान में वह अपने पुत्र अंकुर सोती के पास आजमगढ़ रह रहे थे। आजमगढ़ में उनके पुत्र अंकुर सोती सेवारत हैं।
साहित्य से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने गए थे काशी
नीरज कांत सोती के बिजनौर में रह रहे पुत्र अंकित सोती ने बताया कि वह साहित्य से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने काशी गए थे। पिछले तीन दिनों से वह काशी में ही रह रहे थे। रविवार की रात्रि लगभग एक बजे उन्हें बेचैनी होने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां 1:30 बजे हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया। नीरज कांत सोती अपने पीछे पत्नी सुषमा सोती, पुत्र अंकुर सोती, अंकित सोती सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चंद माहेश्वरी, अनिल शर्मा, डॉ. अजय जनमेजय, अनिल चौधरी आदि ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।