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Bijnor: उपचार के दौरान हथिनी 'गंगा' की मौत, हाथीशाला में छाई उदासी, नानी की शरण में चली गई दुधमुंही खुशी

Thu, 03 Nov 2022 05:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर

सार

बिजनौर के कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में हथिनी  गंगा की पेट की बीमारी के कारण मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में मृतक हथिनी का अंतिम संस्कार किया गया।
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हथिनि गंगा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी की मौत हो गई। गंगा का उपचार वन विभाग के पशु चिकित्सक कर रहे थे। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट में संक्रमण से मौत होना सामने आया है। उसका बिसरा फौरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

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कालागढ़ स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी का उपचार चल रहा था। वह पेट की बीमारी से ग्रसित थी। बुद्धवार की रात्रि में अचानक उसकी तबियत खराब हो गई। हाथीशाला में चिकित्सक आयुष कुमार पहंच गए। उसके बाद रामनगर से डाॅ. राजीव कुमार भी पहुंच गए।

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पशु चिकित्साधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों व एनजीओ के सदस्यों की उपस्थिति में गंगा के शव की जांच की। उसे मृत घोषित करने के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम किया गया। बाद में विभागीय नियमों के अनुसार उसका भीगीं पलकों से अंतिम संस्कार किया गया। गंगा की मौत से वन विभाग में उदासी का आलम है।

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पेट की बीमारी बनी मौत का कारण
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पांडेय ने बताया कि गंगा पेट की बीमारी से पीड़ित थी। उसका उपचार किया जा रहा था। बुद्धवार की रात्रि में उसके पेट में तेज दर्द हुआ। चिकित्सकों के प्रयासों के बाद भी उसे बचाया न जा सका। चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के बाद बताया कि उसके पेट में सक्रमण बढ़ गया था। रक्त स्राव ने उसकी जान ले ली। उसकी मौत से कालागढ़ की हाथीशाला के अलावा समूचे कार्बेट में दुख का माहौल है।

कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी की मौत का सबसे अधिक दुखद पहलू उसकी सात महीने की नन्हीं बच्ची खुशी है। अपनी मां का दूध पी रही बच्ची मां की मौत के बाद स्वयं ही अपनी नानी कंचम्भा की शरण में चली गई। कंचम्भा ने नन्हीं खुशी को अपने पैरों में छिपा लिया।

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सामान्य रूप से हाथी का बच्चा डेड़ वर्ष तक अपनी मां का दूध पीता है। यहां कालागढ़ में गंगा की मौत के बाद उसकी सात माह की बच्ची खुशी की परवरिश अब वन विभाग के सामने एक बड़ी समस्या व चुनौती है। अब उसके लिए विशेष व्यवस्था करनी होगी। अभी तो वह मां के दूध पर ही निर्भर है। वह अपनी मां को ढूंढ रही है। उसे मां के शव से दूर रखा गया है। अन्य हाथी खुशी को अपने साथ रखे हुए हैं।

मादा शिशु लिए दूध आदि का प्रबंध किया जाएगा
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पांडेय ने बताया कि खुशी इस हाथीशाला का सबसे छोटा सदस्य है। फिल्हाल तो वह अपनी नानी की शरण में है। उसके पीने के लिए दूध व तरल भोजन की व्यवस्था चिकित्सकों की राय से की जाएगी। उसे किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए विशेष निर्देश हाथीशाला प्रभारी व अधीनस्थ अधिकारियों को दिए जा रहे हैं। अभी मामला ताजा होने की वजह से सभी हाथी गम में हैं। समय के साथ सभी कुछ सामान्य हो जाएगा।
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