बृहस्पतिवार को भी बालावाली रेलवे स्टेशन और रेल पुल के पास गंगा की धारा तेजी से कटान करती रही। ऐसे में रेलवे की ओर से पूरा अमला जेसीबी और अन्य तमाम संसाधन के साथ पुराने रेल पुल के पास मौजूद रहा। रेलवे की ओर से बालावाली में रेल पुल के गाइड बंध को कटान से बचाने के लिए पुराने स्लीपर डाले गए। पुराने स्लीपर के साथ-साथ रेलवे ने पत्थर का पूरा स्टॉक भी तैयार कर रखा है। साथ ही पत्थरों को गंगा की धारा में स्टड के रूप से डालने के लिए तार के जाल बनाने का काम भी होता रहा।
गंगा धारा के मुहाने पर करीब 50 बीघा जमीन में आम का बाग हुआ करता था। बृहस्पतिवार की दोपहर 2:00 बजे तक इस बाग में केवल 10 से 15 पेड़ ही बचे थे बाकी पूरी जमीन और सैकड़ों पेड़ गंगा की धारा के आगे टिक नहीं पाए और बहते हुए चले गए।
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