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रफ्तार नहीं पकड़ पा रही आयुष्मान भारत योजना

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बिजनौर। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अभी तक जिले में करीब दो लाख 60 हजार गोल्डन कार्ड ही बन पाए हैं। करीब 17 हजार 94 मरीजों ने ही इस योजना के तहत उपचार कराया है। इनमें से लगभग 13 हजार 736 केस का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष मामलों की भुगतान प्रक्रिया अभी लंबित है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के उपचार के लिए आयुष्मान भारत योजना को 23 सितंबर 2018 को लांच किया था। इसके तहत जिले भर के करीब दो लाख 90 हजार परिवारों के लगभग 14 लाख सदस्यों को केंद्र सरकार की ओर से पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाएगा। कार्ड बनवाने के लिए शासन द्वारा निर्धारित 30 रुपये का शुल्क लिया जाता है। इस योजना में शामिल हर व्यक्ति को गोल्डन कार्ड बनवाना अनिवार्य है। योजना के अंतर्गत कार्डधारक मुखिया समेत परिवार के पांच सदस्यों का पांच लाख तक का उपचार चयनित 22 अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार कराया जा सकता है। इनमें जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी धामपुर और अफजलगढ़ तथा 18 प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं। योजना के कार्ड जिला अस्पताल में बनाए जा रहे हैं। हालांकि जागरूकता का अभाव कहें या कुछ और अभी तक मात्र दो लाख 60 हजार कार्ड ही बन पाए हैं। इनमें भी 17 हजार 94 लोगों ने ही इस योजना का लाभ लिया है। इनमें से 13 हजार 736 केस का भुगतान हो चुका है, जबकि इलाज का प्रमाणपत्र जमा नहीं होने के चलते शेष मामलों की भुगतान प्रक्रिया अभी लंबित है।
आयुष्मान भारत योजना की जिला कोऑर्डिनेटर डा. नताशा सिंह ने बताया कि जागरुकता के अभाव में लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। लोगों को जागरुक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल, महिला अस्पताल सहित जनपद के अन्य सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गोल्डन कार्ड बनाए जाते हैं। कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर कार्ड बनाने के बदले शासन द्वारा निर्धारित 30 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। इस योजना में शामिल व्यक्ति सीएससी पर आकर आयुष्मान भारत की सूची में अपना नाम चेक कर सकता है।
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