जिले में महंगी होती जा रही खेती की जमीन
अजीत चौधरी
बिजनौर। गन्ने की खेती के लिए जानी जाने वाली जिले की खेती की जमीनों के रेट अब आसमान छू रहे हैं। किसानों की जमीन के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि बिजनौर जिले में वेस्ट यूपी में सबसे महंगी जमीन हैं। इसका सारा फायदा किसानों को ही मिल रहा है। अगर किसान कहीं महंगी जमीन बेच रहे हैं तो वे दूसरे इलाकों में जाकर महंगी जमीन खरीद भी रहे हैं। पैसे को निवेश करने के लिए भी जमीन सबसे लाभकारी सौदा साबित हो रही है।
जिले में कई नदियां हैं और यहां पर सिंचाई के साधनों की कोई कमी नहीं है। किसान गन्ना, गेहूं, धान आदि की खेती कर रहे हैं। अगर बारिश कम या ज्यादा भी हो तो इससे जिले के किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होता है। इसके अलावा जिले के किसान व मध्यम वर्ग के लोग खुद के मकान बनाने पर बहुत ध्यान दे रहे हैं। किसानों के परिवार भी काफी संख्या में पढ़ाई और नौकरी के उद्देश्य से शहरों के पास के गांवों में मकान बनाने के लिए जमीन खरीद रहे हैं। इससे किसानों की जमीन के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। जिला मुख्यालय ही नहीं जिले की लगभग सभी तहसीलों में यही देखने को मिल रहा है।
हालत यह हैं कि जहां चार साल पहले तक बिजनौर में नजीबाबाद रोड पर सेंट्रल वेयर हाउस के आसपास कुछ ही मकान थे। वहां अब कई किलोमीटर आगे गांव पेद्दा तक आबादी हो गई है। मंडावर रोड, नूरपुर रोड, चांदपुर रोड, बैराज रोड पर बहुत तेजी से प्लाटिंग चल रही है। इसका सारा फायदा किसानों को मिल रहा है। किसानों को जमीन बेचकर काफी पैसा मिल रहा है। जमीन के तमाम सड़कों में अधिग्रहीत होने से भी किसानों को फायदा हुआ है। जिले की जनता भी प्लाट खरीदने में किसी से पीछे नहीं हैं। जो भी कॉलोनी कटनी शुरू होती है, कुछ ही दिनों में उसमें मकान बनते नजर आने लगते हैं।
जमीनों के दाम एक नजर में
नजीबाबाद रोड 25 लाख
चांदपुर रोड 15 लाख
बैराज रोड 70 से 80 लाख रुपये
नूरपुर रोड 10 से 15 लाख
मंडावर रोड 30 लाख
(नोट : जमीन के दाम प्रति बीघा में हैं। ये उन जमीनों के दाम हैं, जहां पर अभी प्लाटिंग होने में समय लगेगा।)
बिजनौर में हुए बैनामे व आय की स्थिति
साल बैनामे राजस्व
2014-15 36143 113
2015-16 34345 122
2016-17 28677 112
2017-18 32808 127
2018-19 37586 155
2019-20 39927 165
2020-21 44378 184
(नोट : राजस्व करोड़ रुपये में हैं।)
कोरोना काल में बढ़े बैनामे
पिछले वित्तीय वर्ष में कोरोना के समय उद्योग धंधे काफी प्रभावित रहे। कोरोना होने के बाद भी जमीन के दाम कम होने की बजाय और बढ़ गए। इसकी सबसे बड़ी वजह रही व्यापारियों व उद्योगपतियों द्वारा जमीन की खरीदारी में निवेश करना। नोटबंदी के साल बैनामे घटे थे, लेकिन कोरोना काल में बैनामे और बढ़ गए। सहायक आयुक्त स्टांप अजय त्रिपाठी के अनुसार बिजनौर के लोग जमीन की काफी खरीदारी कर रहे हैं। जिले को बैनामों से स्टांप ड्यूटी से मिलने वाला राजस्व लगातार बढ़ रहा है।