पंचायतों में लागू होगा सिटीजन चार्टर मॉडल
बिजनौर। शासन ग्रामीणों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके लिए पंचायतों में सिटीजन चार्टर माडल लागू करने की तैयारी है। मॉडल में कार्य कराने की समय सीमा तय होगी। चार्टर के अनुसार कार्य नहीं होने पर सचिव के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। पंचायतों में 20 लाख से अधिक लोग रहते हैं। ग्रामीणों को जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल आदि मूलभूत सुविधाएं पंचायत से मिलती हैं। शासन को ग्रामीणों को मांगे गए अभिलेख देने में अनावश्यक रूप से परेशान करने की लगातार शिकायत मिल रही थीं। पंचायतीराज विभाग के अनुसार अब ऐसा नहीं होगा। शासन ने घिसी-पिटी परिपाटी में बदलाव लाने के लिए सिटीजन चार्टर मॉडल लागू करने का फैसला लिया है। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि सिटीजन चार्टर मॉडल के क्रियान्वयन को लेकर शासन से दिशा-निर्देश मिल गए हैं। मॉडल को 15 अगस्त से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।
क्या है सिटिजन चार्टर मॉडल
सिटीजन चार्टर मॉडल में ग्रामीणों द्वारा मांगी सेवाओं को प्रदान करने की समय सीमा तय होगी। जैसे जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र देने के लिए तीन दिन का समय, व्यापार लाइसेंस देने का समय तीन दिन, मनरेगा में मांगे गए काम की सीमा 15 दिन, पशु चिकित्सा देखभाल सेवा व्यवस्था करने के बारे में सात दिन निर्धारित हैं। मॉडल में पंचायत स्तर पर इस तरह की एक दर्जन से अधिक सेवा शामिल हैं।
ऐसे लागू होगा मॉडल
सिटीजन चार्टर मॉडल के नोडल अधिकारी डीपीआरओ होंगे। मांगे गए कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की होगी। तय समय में काम पूरा नहीं होने पर ग्रामीण डीपीआरओ को शिकायत कर सकता है। जांच में शिकायत सही मिलने पर पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई होगी। सचिव हर सप्ताह बैठक करके ग्रामीण की मांग को पंचायत की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। कार्य के बारे में संबंधित विभाग को जानकारी देंगे। सेवा प्रदान करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति का नाम व विवरण अंकित करना होगा।