बिजनौर। जिले के लघु एवं मध्यम उद्यमियों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब सरकार ने बिजली दरों में 10 प्रतिशत वृद्धि की घोषण की है। इससे उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
औद्योगिक इकाइयों का संचालन बड़े पैमाने पर बिजली पर निर्भर है। आटा चक्की, स्पेलर, राइस मिल, वेल्डिंग यूनिट, फर्नीचर निर्माण, पैकेजिंग सहित अन्य लघु उद्योगों में बिजली की जरूरत रहती है। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि से मासिक खर्च में बढ़ोतरी होगी। उद्यमियों का कहना है कि पहले से ही डीजल और पेट्रोल महंगे होने के कारण परिवहन लागत बढ़ी हुई है। अब बिजली महंगी होने से उत्पादन लागत और बढ़ जाएगी।
उद्यमी अवनीश अग्रवाल का कहना है कि बिजली और ईंधन दोनों की लागत बढ़ने से दोहरा आर्थिक दबाव बन रहा है। उत्पादन लागत बढ़ने से तैयार उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि करनी पड़ सकती है। इससे बाजार में मांग प्रभावित होने की आशंका है। आईआईए के डिविजनल चेयरमैन विकास अग्रवाल का कहना है कि लघु एवं मध्यम उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार को विशेष रियायत या सब्सिडी पर विचार करना चाहिए। ताकि, उद्योगों पर बढ़ते खर्च का बोझ कम हो सके।