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छोइया के बाद अब स्वाहेड़ी में मौत का खौफ

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बिजनौर के ग्राम स्वाहेड़ी में खेतों में पड़ा फैक्ट्री से निकला केमिकल युक्त पानी। - फोटो : BIJNOR
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छोइया के बाद अब स्वाहेड़ी में मौत का खौफ
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मोहम्मद यूनुस
गजरौला शिव/बिजनौर। शहर के पास के गांव स्वाहेड़ी को मानों कैंसर का श्राप लग गया है। डेढ़ साल में आठ लोग कैंसर से जान गवां चुके हैं और कई का अभी इलाज चल रहा है। अब तक छोइया नदी के किनारे के करीब एक दर्जन गांव इस बीमारी से जूझ रहे हैं। वहां भी छोइया नदी में केमिकल वाला पानी छोड़े जाने को जिम्मेदार माना जा रहा था। स्वाहेड़ी के लोग भी गांव के आसपास खेतों में फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल वाला पानी डाले जाने को जिम्मेदार मान रहे हैं। हालांकि लगातार होती मौत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग हालातों से अनजान बना हुआ है। उधर, बीमार ग्रामीणों को इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिला मुख्यालय के निकट गांव स्वाहेड़ी में कैंसर का कहर जारी है। किसी के पेट तो किसी के हाथ, पैर और मुंह में कैंसर की पुष्टि हो रही है। डेढ़ वर्ष के अंतराल में अब तक आठ लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। गांव में सबसे पहले डेढ़ वर्ष पूर्व कुलवीर सिंह 70 वर्ष ने 10 वर्ष तक पीजीआई चंडीगढ़, दिल्ली एम्स, जौली ग्रांट आदि अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन मौत ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 60 वर्षीय राजपाल सिंह की पांच माह पूर्व, 55 वर्षीय मुनेश्वर सिंह की चार माह पूर्व, 50 वर्षीय सुखराम सिंह की ढाई माह पूर्व, 70 वर्षीय सीताराम की चार माह पूर्व, 60 वर्षीय राजवीर सिंह की छह माह पूर्व, 70 वर्षीय राजपाल सिंह, विजयपाल सिंह की कैंसर से मौत हुई है। इन लोगों ने दिल्ली एम्स, पीजीआई चंडीगढ़, जौलीग्रांट तो किसी ने ऋषिकेश एमरसन में इलाज कराया। गांव की पुष्पा देवी को छाती के पास कैंसर है। उसने भी अपना इलाज बड़े अस्पतालों में कराया लेकिन हालत नाजुकबनी हुई है। (संवाद)
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नलों का पानी डालने से फट जाता है दूध
स्वाहेड़ी निवासी धीरेंद्र सिंह, चरण सिंह, विनोद कुमार, डॉ. विद्यासागर आर्य आदि बताते हैं कि कई लोग अभी भी बीमार हैं। कुछ लोग ठीक हुए हैं। उन्होंने अपने घरों में नलों के पानी की जांच कराई तो कुछ नलों का पानी सही पाया गया तो कुछ का पानी खराब निकला। घरों में लगे नलों के पानी से चाय भी नहीं बनाई जाती। कोई चाय बनाता है तो चाय में दूध डालने पर वह फट जाता है। ज्यादातर लोग सरकारी हैंडपंपों व समरसेविल का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
चंद रुपये के लालच में खेतों में घुल रहा जहर
ग्रामीणों का मानना है कि फैक्टरियों से निकला केमिकल युक्त गर्म पानी को खेतों में डालना इसका मुख्य कारण है। फैक्टरी मालिक लोगों को पैसों का लालच देकर फ्री में खेतों में गर्म कैमिकल युक्त पानी के टैंकर डाल जाते हैं। मना करने पर कर्मचारी रात के अंधेरे में अब खेतों में केमिकल युक्त पानी डाल रहे हैं। गांव के पास चारागाह में पानी डालना आम बात है। यह पानी 15 से 20 दिन के बाद सूखता है, जिस खेत में पानी होता है उसके पास से ग्रामीणों को निकलना दूभर हो जाता है।
समय पर इलाज मिला तो बची जान
अमित की 11 साल की बेटी कनक को ब्लड कैंसर था। कनक के पिता अमित बताते हैं कि जब कनक पांच साल की थी उसके गले में गांठ हुईं, बुखार आया जांच कराने पर पता कि उसे ब्लड कैंसर है। दिल्ली के मेदांता अस्पताल ले गए। जांच कराने पर उसे ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई। उन्होंने कनक का इलाज दिल्ली के आयुर्विज्ञान संस्थान में तीन वर्ष तक कराया। अब वह पूरी तरह ठीक है। 75 वर्षीय रामचरन सिंह बताते हैं कि उनके मुंह में शुरुआत में जीभ के पास एक छोटा दाना बना था। दस दिन बाद परेशानी होने पर बिजनौर के नाक, कान, गला वाले चिकित्सक को दिखाया गया। चिकित्सक ने हायर सेंटर जाने की सलाह दी। चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में जांच में कैंसर का पता चला। 2015 में इलाज कराया अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
न बरतें लापरवाही : एसीएमओ
एसीएमओ डॉ.एसके निगम के अनुसार गांव वाले लापरवाही न बरतें और इलाज कराते रहें। वे जिला अस्पताल में भी अपनी जरूरत के हिसाब से उपचार करा सकते हैं। गांव वालों की मांग पर गांव में कैंप लगाया जाएगा।
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दिखवाएंगे मामले को : आशुतोष चौहान
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी आशुतोष चौहान के अनुसार खेतों में केमिकलयुक्त पानी डालने की कोई शिकायत नहीं मिली है। मामले को दिखवाया जाएगा।

बिजनौर के ग्राम स्वाहेड़ी की कनक।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम स्वाहेड़ी के रामचरण सिंह।- फोटो : BIJNOR

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