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पीने लायक नहीं रहा अमरोहा के गांवों में लगाए इंडिया मार्का हैंडपंपों का पानी

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758 हैंडपंपों के भेजे नमूनों की जांच ने उड़ाई विभागीय अधिकारियों के चेहरे की रंगत
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150 हैंडपंपों का पानी का रंग काला मिला, कुछ का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया

अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
धरती के पानी में तेजी से बदलाव आ रहा है। पर्यावरण के साथ ही पानी भी दूषित हो रहा है। जनपद के तीन ब्लाकों से ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता कार्यक्रम विभाग द्वारा 758 इंडिया मार्का हैंडपंपों के पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। जिनकी जांच रिपोर्ट बड़ी चौंकाने वाली है। 150 हैंडपंपों के पानी का रंग काला पाया गया है, जबकि कुछ का पीने योग्य ही नहीं है। अत्यधिक गंदला है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विभाग ने इन हैंडपंपों पर लाल निशान लगाने की कार्रवाई छेड़ने की बात कही है।
कुछ दिन पहले विभाग के कर्मचारियों ने धनौरा, गजरौला, हसनपुर व जोया ब्लाक क्षेत्र के 758 इंडिया मार्का हैंडपंपों के नमूने भरे थे, जिन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया था। करीब एक माह बाद पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आई, जिसने सबको चकित कर दिया। 150 हैंडपंप का पानी काला मिला है, जिसमें जीवाणुओं के अत्यधिक होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 130 नलों का पानी ठीक नहीं है। पीलापन होने से पानी पीने लायक नहीं है। केवल 270 नलों का पानी सही मिला है। जिन हैंडपंपों का पानी खराब पाया गया है, वह गजरौला, धनौरा व हसनपुर क्षेत्र के हैं। जोया ब्लाक के कुछ गांवों के हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं मिला है। पूरी रिपोर्ट की पड़ताल करने के बाद विभागीय कर्मियों ने खराब पानी वाले हैंडपंपों पर लाल रंग यानी खतरे का निशान बनाने का फैसला लिया है। साथ ही उनको रिबोर कराने की कार्रवाई भी छेड़ने की बात कही है। काले पानी वाले हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर डालकर जीवाणुओं को मारने का कार्य होगा। इसके बाद भी पानी शुद्ध नहीं मिला तो अगला कदम उठाया जाएगा।
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इस विधि से कर सकते हैं काले पानी की जांच
माचिस की डेढ़ डिबिया ब्लीचिंग पाउडर का घोल प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में बना लें। इसे पानी से भरे प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में डालें। अच्छी तरह मिलाकर दस मिनट थिराने के लिए छोड़ दें, ताकि चूना व मैल नीचे बैठ जाए। थिराए हुए चूने एवं बाल्टी के नीचे के पानी को छोड़कर ऊपर के पानी को दूसरे बाल्टी में डालें। हैंडपंप को चलाकर करीब 15 मिनट पानी को बहा दें। हैंडपंप के हेड को खोल दें। इसके बाद ब्लीचिंग पाउडर का घोल हैंडपंप के अंदर डाल दें। हैंडपंप को अब बंद कर दें और रात भर छोड़ दें। अगली सुबह 15 मिनट हैंडपंप चलाकर पानी बहा दें। फिर पानी पीने के लिए इस्तेमाल करें। यह जीवाणु मुक्त पानी होगा। इसके बाद भी पानी खराब आ रहा है तो अधिकारियों को सूचित करें। पानी का इस्तेमाल न करें।

ये बीमारियां हो सकती हैं..
डायरिया : मरीज को बार-बार दस्त होता है एवं शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसके कारण कभी कभी मृत्यु भी हो जाती है। टॉयफाइड : इसमें मरीज को काफी तेज बुखार हो जाता है, जोकि जानलेवा भी हो सकता है।
थ्रेड एवं राउंड कृमि : दूषित जल को पीने के कारण लोगों के पेट या आंतों में कृमि प्रवेश कर जाते हैं, जोकि मरीज की आंतों या पेट से पोषक तत्वों को चूसते हैं, जिसके कारण मरीज काफी कमजोर हो जाता है।
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- इसके अलावा पोलियो, कॉलरा, डिसेंट्री व पीलिया भी जैविक जल प्रदूषण के कारण ही होते हैं।


गांव-गांव में पानी की जांच को किट दी गई है। कोई भी इंडिया मार्का या फिर अपने घरेलू नल के पानी की जांच किट के द्वारा कर सकता है। जिन पर किट है, उनको जांच का तरीका भी बताया है।
मदन वर्मा, सीडीओ।
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