बिजनौर। शिक्षामित्र आंदोलन पर हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा पटरी से पूरी तरह उतर गई है। दूसरे चरण में आंदोलन के पांचवें दिन भी शिक्षामित्र स्कूल नहीं लौटे हैं। जिले के तीन हजार शिक्षामित्र लखनऊ कूच कर गए। स्कूलों में व्यवस्था बनाने को मशक्कत करनी पड़ रही है। काफी स्कूल ऐसे हैं जिनमें शिक्षामित्रों के हड़ताल पर जाने से स्कूलों में एक-एक शिक्षक के भरोसे ही काम चलाना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त करने के बाद शिक्षामित्रों में आक्रोश है। पहले चरण में शिक्षा मित्रों ने जिला स्तर पर 25 जुलाई से बीएसए कार्यालय पर धरना दिया था। यह धरना एक सप्ताह चला था। शिक्षामित्रों के पदाधिकारियों की लखनऊ में सीएम से हुई वार्ता के बाद धरना 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन शिक्षामित्रों को अभी भी राहत नहीं मिली। दूसरे चरण में शिक्षामित्रों ने 16 अगस्त से बीएसए कार्यालय पर फिर से धरना दिया। रविवार को जिले के शिक्षामित्र बड़ी संख्या में लखनऊ कूच कर गए। सोमवार से पूरे प्रदेश के शिक्षामित्र लखनऊ में डेरा डाले हैं। जिले में तीन हजार शिक्षामित्रों को शिक्षक पदों पर समायोजित किया गया है। जिले में 1756 परिषदीय प्राथमिक विद्यालय हैं। काफी स्कूल ऐसे हैं जिनमें दो से तीन शिक्षामित्र तैनात हैं। इन स्कूलों में शिक्षामित्रों के हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्था गड़बड़ा गई है। ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी व्यवस्था बनाने में जुटे हैं, पर कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा। ऐसे में बेसिक शिक्षा पूरी तरह से पटरी से उतरी है। उधर, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के मंडल प्रभारी सुचित मलिक व प्रांतीय महामंत्री पुनीत चौधरी ने बताया कि मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, बीएसए महेश चंद्र के मुताबिक जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों स्कूलों में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मटौरामान के स्कूल में पांचवें दिन भी ताले लटके रहे
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नींदडू़ । शिक्षामित्रों की हड़ताल और मुख्य अध्यापक के अभाव में मटौरामान स्थित प्राथमिक विद्यालय में पिछले पांच दिनों से ताले लटके हैं। पढ़ाई नहीं होने के कारण अभिभावकों में रोष है और मुख्य अध्यापक की शीघ्र नियुक्ति के साथ पढ़ाई भी सुचारु करने की मांग की है।
सोमवार को मटौरामान के प्रधान मोहम्मद फय्याज ने बताया कि मटौरामान के प्राथमिक विद्यालय में 92 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में काफी दिनों से मुख्य अध्यापक नियुक्त नहीं हैं। स्कूली बच्चों का पठन पाठन चार शिक्षामित्रों के सहारे चल रहा था। शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में समायोजित किए जाने की प्रक्रिया के चलते सुधीर चौहान, नाजिया परवीन तथा अमित चौहान का दूसरे विद्यालयों में समायोजन किया गया था। इस कारण स्कूल का दारोमदार केवल एक शिक्षामित्र हरगूलाल के सिपुर्द था। मूल पद पर वापसी के आदेश के बाद शिक्षामित्र द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में पुन: हड़ताल पर जाने के कारण 16 अगस्त से स्कूल में ताले लटके हैं। सोमवार को भी विद्यालय में ताले लटके देखकर बच्चे अपने घरों को वापस चले गए। स्कूल बंद होने के कारण बच्चों के रोजाना लौट आने से दुखी अभिभावक राजेंद्र सिंह, कौशल कुमार, कुंदन सिंह, विजयपाल सिंह, डा नाजिर हुसैन, शेर अली तथा रेशमा परवीन आदि ने विद्यालय में हर हालत में मुख्य अध्यापक की नियुक्ति किए जाने तथा बच्चों की पढ़ाई की उचित व्यवस्था करने की मांग की है।